देश की खबरें | अग्निपथ पर आशंका बरकरार, राज्यों ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण की नहीं की है घोषणा

नयी दिल्ली, 26 जून अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले सैनिकों के भविष्य को लेकर अभी भी आशंका बनी हुई है क्योंकि केंद्र और कई राज्य सरकारों ने सशस्त्र बलों में सेवा के चार साल बाद सेवानिवृत्त होने पर उनके पुनर्वास के लिए एक व्यापक योजना तैयार नहीं की है।

युवाओं की चिंता को और बढ़ाते हुए विपक्षी दलों द्वारा शासित किसी भी राज्य ने इस योजना के तहत अग्निवीर को काम पर रखने के लिए किसी भी अनुकूल भर्ती योजना की घोषणा नहीं की, जबकि कुछ ने इसे पूरी तरह से वापस लेने की मांग की है।

अग्निपथ योजना की घोषणा 14 जून को की गई थी। उसके बाद, कम से कम 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों-बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें से कुछ हिंसक थे।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और असम ने घोषणा की कि वे पुलिस की भर्ती में अग्निवीर को वरीयता देंगे, वहीं गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने अग्निवीर के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में 10 प्रतिशत रिक्तियों को आरक्षित करने का फैसला किया है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं होगी। राज्य पुलिस भर्ती बोर्ड के प्रमुख ने कहा कि रोजगार में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है और अधिकतर अग्निवीर अनारक्षित श्रेणी में होंगे क्योंकि सेना में कोई आरक्षण प्रणाली नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, यह विचार कि उन्हें सीएपीएफ और राज्य पुलिस में समाहित किया जा सकता है, काम नहीं कर सकता है। उन पर केवल 50 प्रतिशत अनारक्षित रिक्तियों के खिलाफ विचार किया जाना है। इसका मतलब यह भी होगा कि मेधावी और बेहतर पढ़े-लिखे गैर-अग्निवीर को पुलिस में शामिल होने में मुश्किल होगी। इससे पुलिस की कार्यकुशलता प्रभावित होगी।’’

राज्य पुलिस भर्ती बोर्ड के प्रमुख ने पूछा, ‘‘तब सेना भर्ती की नीति सरकार के असैन्य क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था के साथ कैसे मेल खा सकती है।’’

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी जांच के दायरे में आ सकती है क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि सशस्त्र बलों में चार साल के कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त अग्निवीर के वेतन की रक्षा की जाएगी और वरिष्ठता को बनाए रखा जाएगा।

एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘सरकार के लिए यह एक कड़ा कदम होगा क्योंकि इसे मंजूरी देते समय राज्य पुलिस द्वारा सीधे भर्ती किए गए कांस्टेबल के बीच किसी भी तरह के असंतोष से बचने पर भी विचार करना होगा।।’’

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि अग्निपथ योजना के तहत देश की सेवा करने वाले युवाओं को ‘ग्रुप सी’ (अराजपत्रित पद) या हरियाणा पुलिस की नौकरी की गारंटी दी जाएगी। हालांकि, राज्य सरकार को अभी यह बताना बाकी है कि सरकारी नौकरियों का कितना प्रतिशत अग्निवीर के लिए आरक्षित किया जाएगा।

इसी तरह, उत्तराखंड सरकार पुलिस, आपदा और चार धाम प्रबंधन विभागों में अग्निवीर को समायोजित करने की योजना बना रही है। हालांकि, उत्तराखंड सरकार की नौकरियों में अग्निवीर के लिए किसी विशेष कोटा की घोषणा नहीं की गई है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और असम की सरकारों ने घोषणा की है कि वे पुलिस भर्ती में अग्निवीर के लिए नौकरियां आरक्षित करेंगे लेकिन अभी तक प्रतिशत या कैसे इस प्रक्रिया को अंजाम देंगे इस बारे में नहीं बताया है। संपर्क करने पर, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने पीटीआई- को बताया, ‘‘राज्य सरकार मुख्यमंत्री द्वारा घोषित यूपी पुलिस की भर्ती में अग्निवीर को प्राथमिकता देगी।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)