इंदौर (मध्यप्रदेश), 11 अक्टूबर इंदौर में ‘‘सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका’’ में एक निजी महाविद्यालय के गरबा कार्यक्रम से गिरफ्तार चार युवकों को सोमवार को प्रशासन ने जेल भेज दिया। इसके साथ ही, गरबा कार्यक्रम में तय संख्या से ज्यादा लोगों को जुटाने के आरोप में महाविद्यालय प्रबंधन के एक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
चश्मदीदों ने बताया कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रविवार देर रात इस गरबा कार्यक्रम में पहुंचकर हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस ने वहां से वर्ग विशेष के चार युवकों को हिरासत में ले लिया था।
प्रशासन के अनुविभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) पराग जैन ने बताया कि वर्ग विशेष के चार युवकों को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 151 (संज्ञेय अपराध घटित होने से रोकने के लिए की जाने वाली एहतियातन गिरफ्तारी) के तहत गांधी नगर क्षेत्र में एक निजी महाविद्यालय के परिसर में रविवार रात आयोजित गरबा कार्यक्रम से पकड़ा गया था।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका में गिरफ्तार चारों युवकों को सोमवार को स्थानीय जेल भेज दिया गया।
बजरंग दल के स्थानीय संयोजक तरुण देवड़ा ने गांधी नगर पुलिस थाने में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया है कि प्रशासन ने संबंधित निजी महाविद्यालय को गरबा कार्यक्रम में केवल 800 छात्र-छात्राओं को बुलाने की अनुमति दी थी, लेकिन महाविद्यालय प्रबंधन ने इसे वाणिज्यिक आयोजन में तब्दील करते हुए टिकट बेचे और इसमें 2,000 से 3,000 लोगों को बुला लिया।
देवड़ा ने अपनी शिकायत में इस बात पर आपत्ति जताई कि महाविद्यालय के गरबा कार्यक्रम में एक वर्ग विशेष के युवक कथित रूप से बड़ी तादाद में शामिल हुए।
अधिकारियों ने बताया कि बजरंग दल पदाधिकारी की शिकायत पर महाविद्यालय प्रबंधन के अक्षय तिवारी के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 188 (किसी सरकारी अधिकारी का आदेश नहीं मानना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है।
इस बीच, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अमीनुल खान सूरी ने वर्ग विशेष के चार युवकों को गरबा कार्यक्रम से गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘क्या सूबे में भाजपा के राज में अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल भी नहीं हो सकते? पुलिस और प्रशासन को संविधान का पालन करना चाहिए।”
हर्ष
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