नयी दिल्ली, 25 जून प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका की यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किये गए रक्षा समझौतों को ‘‘ऐतिहासिक’’ बताते हुए पूर्व रक्षा सचिव अजय कुमार ने कहा कि ‘प्रीडेटर’ ड्रोन का इस्तेमाल करने वाले कई देश इसके रख-रखाव और मरम्मत कार्यों के लिए भारत आ सकते हैं।
भारत और अमेरिका ने 31 हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (एचएएलई) यूएवी के लिए तीन अरब अमेरिकी डॉलर का समझौता किया, जिसमें से नौसेना को 15 सी-गार्डियन ड्रोन मिलेंगे, जबकि थलसेना और भारतीय वायुसेना को आठ-आठ स्काई-गार्डियन ड्रोन मिलेंगे।
दोनों देशों के एक संयुक्त बयान में पुष्टि की गई कि इन अत्याधुनिक ड्रोन को भारत में तैयार किया जाएगा, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों की खुफिया, निगरानी और लक्ष्य प्राप्ति क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कुमार ने कहा, ‘‘जब अमेरिका ऐसे उन्नत उपकरण बेचता है, तो वह देश के बाहर किसी भी तरह के विनिर्माण के लिए कभी सहमत नहीं होता है। लेकिन इस विशेष मामले में उसने कहा है कि प्रीडेटर ड्रोन को यहां तैयार किया जाएगा और इन ड्रोन के लिए रख-रखाव, मरम्मत केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि पूर्ण रख-रखाव, मरम्मत (एमआरओ) केंद्र का मतलब है कि इन ड्रोन का रख-रखाव भारत में किया जाएगा। जनरल एटॉमिक्स एमक्यू-9बी हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (एचएएलई) यूएवी के महत्व पर जोर देते हुए, कुमार ने कहा कि ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन जैसे देश एमक्यू-9 प्रणाली का संचालन करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि प्रीडेटर्स एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसका इस्तेमाल अन्य देश भी कर रहे हैं। इसलिए हम उम्मीद कर सकते हैं कि भविष्य में, अन्य देशों के कुछ प्रीडेटर्स रख-रखाव, मरम्मत के लिए भारत लाए जाएंगे।’’
जीई414 लड़ाकू विमान इंजन के लिए जनरल इलेक्ट्रिक और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के बीच समझौता ज्ञापन पर, कुमार ने कहा कि विमानन इंजन के निर्माण में भारत पीछे रहा है और यह समझौता लड़ाकू विमानों का इंजन देश में विकसित करने के संबंध में मील का पत्थर साबित होगा।
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