नयी दिल्ली, 27 सितंबर कृषि विधेयकों पर विरोध को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होने की शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की घोषणा के एक दिन बाद पार्टी नेता नरेश गुजराल ने रविवार को कहा कि अरुण जेटली के निधन के बाद पंजाब के मानस को समझने वाला कोई नेता भाजपा में नहीं हैं।
अकाली दल के राज्यसभा सदस्य गुजराल ने उम्मीद जतायी कि केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार पंजाब में स्थिति से निपटने में "कुछ संवेदनशीलता" दिखाएगी।
गुजराल ने कहा कि गठबंधन से अलग होने का फैसला पार्टी कैडर से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर किया गया था। उन्होंने कहा कि कैडर-आधारित पार्टी होने के नाते अकाली दल उनकी इच्छाओं का सम्मान करता है।
भाजपा के साथ लंबे जुड़ाव के संबंध में उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से, अरुण जी (पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली) के निधन के बाद, पंजाब के मानस को समझने वाला भाजपा में कोई नहीं है।’’
गुजराल ने कहा कि पंजाब में सभी तबकों के लोग कृषि संबंधी विधेयकों के मुद्दे पर काफी नाराज हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि स्थिति के हाथ से निकल जाने के पहले इस अंतिम चरण में भी केंद्र, पंजाब की स्थिति से निपटने में थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएगा।’’
एक अन्य वरिष्ठ अकाली नेता बलविंदर सिंह भुंडर ने कहा कि अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन चार दशकों तक जारी रहा लेकिन अब समीकरण बदल गया है।
उन्होंने कहा, "हम कांग्रेस के अत्याचारों के खिलाफ लड़ने के लिए एक साथ आए। किसानों और पंजाब के मुद्दों पर हमेशा अकाली दल से सलाह ली गयी। लेकिन अब भाजपा किसानों से संबंधित मुद्दों और पंजाब के बारे में हमारी चिंताओं को नहीं सुनती।’’
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के शासन के विपरीत मौजूदा राजग में सहयोगियों को बहुत महत्व नहीं दिया गया है।
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