पुणे, नौ अप्रैल महाराष्ट्र के पुणे में एक गर्भवती महिला की मौत को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल के आसपास किसी भी प्रकार की भीड़ जमा होने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
भाजपा के विधान परिषद सदस्य अमित गोरखे के निजी सचिव की पत्नी तनीषा भिसे को 10 लाख रुपये जमा न करने पर कथित तौर पर दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने एक अन्य अस्पताल में जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया और उनकी मौत हो गई।
प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने चार अप्रैल को अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और महिला की मौत के लिए कथित रूप से जिम्मेदार डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
संयुक्त पुलिस आयुक्त रंजन कुमार शर्मा द्वारा मंगलवार को जारी निषेधाज्ञा के अनुसार, प्रदर्शन के कारण मरीजों और उनके परिजनों को असुविधा हुई, यातायात बाधित हुआ तथा एंबुलेंस की आवाजाही में भी परेशानी हुई।
शर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करते हुए अस्पताल के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की भीड़ एकत्रित होने पर रोक लगा दी है। हालांकि, इस आदेश में मरीजों, उनके परिजनों और एंबुलेंस की आवाजाही की छूट दी गई है।
इस बीच, अस्पताल की एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने जनता के आक्रोश, सोशल मीडिया पर आलोचना और धमकी भरे फोन कॉल को इस्तीफे के पीछे का कारण बताया है।
महिला की मौत की जांच कर रही समिति ने पाया कि अस्पताल ने उन नियमों का उल्लंघन किया है जिनके तहत आपातकालीन मामलों में चैरिटेबल अस्पतालों को अग्रिम भुगतान की राशि की मांग नहीं करनी चाहिए।
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