ताजा खबरें | अभिभाषण कांग्रेस दो अंतिम रास

उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान जो कुछ हुआ, वह किसानों को विभाजित करने की साजिश थी।

खड़गे ने सरकार पर किसानों के साथ किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा ‘‘अगर स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू किया जाता तो यह कहा जा सकता था कि प्रधानमंत्री किसानों के साथ खड़े हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’’

उन्होंने कहा ‘‘प्रधानमंत्री कांग्रेस की सरकारों पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाया। लेकिन यह सच नहीं है। हमने एमएसपी 219 फीसदी तक बढ़ाया जबकि इसकी तुलना में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बढ़ाया गया एमएसपी बहुत कम है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि आदि के नाम पर किसानों के साथ केवल धोखा हुआ है जबकि कांग्रेस की सरकार ने किसानों का कर्ज माफ किया था।

इसी पार्टी के प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि तीनों कृषि कानून कुछ बड़े कारपोरेट घरानों को लाभ देने के लिए लाए गए हैं। ’’

उन्होंने कहा ‘‘कोविड-19 का कहर पूरी दुनिया पर टूटा। अर्थव्यवस्था तबाह हो गई, लोगों की नौकरियां चली गईं, प्रवासी मजदूर बेहाल हो गए। ऐसे में सरकार को इन कानूनों को लाने की क्या जल्दी थी ? क्या कुछ समय तक इंतजार नहीं किया जा सकता था ? ये कानून किसानों के हित में तो हैं ही नहीं। फिर इन्हें जल्दबाजी में अध्यादेशों का रास्ता चुन कर क्यों लाया गया ?’’

बाजवा ने कहा ‘‘1971 में बांग्लादेश के लिए हुई लड़ाई में पाकिस्तान के 93 हजार युद्धबंदी हमारे पास थे। हमने दो साल तक उनके खाने पीने रहने का इंतजाम किया। लेकिन आज आपने अपने ही किसानों का बिजली, पानी बंद कर दिया। कल 12 दलों के नेता गाजीपुर गये, उन्हें पुलिस ने अंदर जाने नहीं दिया। क्या यह लोकतंत्र है ?’’

उन्होंने कहा ‘‘सरकार ने खुद माना है कि इन कानूनों में कमी है। सरकार ने इन कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने की बात भी कही है। फिर ऐसी क्या जिद है कि आप इन कानूनों को वापस नहीं लेंगे?’’

बाजवा ने कहा ‘‘संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है। संसद में इन कानूनों को बिना मतविभाजन कराये बिना पारित कर दिया गया। अब किसान अपना हक किससे मांगेंगे ?’’

उन्होंने कहा ‘‘लाल किले पर 26 जनवरी को जो कुछ हुआ, उसका मुझे बेहद अफसोस है। पंजाबी होने के नाते, सिख होने के नाते मैं इसकी निंदा करता हूं। लेकिन इसके लिए किसे आतंकवादी कहा जा रहा है? हमारे पंजाब में हर माह हमारा एक न एक बच्चा सीमा से तिरंगे में लिपट कर आता है। आतंकवाद का दंश हमने लंबे समय तक सहा है। हमें इसका दर्द पता है।’’

उन्होंने 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा की उच्चतम न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कराने की मांग की।

उन्होंने कहा ‘‘प्रधानमंत्री कहते हैं कि उनके और किसानों के बीच एक फोन कॉल की दूरी है। पहले यह बताएं कि किसके प्रास प्रधानमंत्री का नंबर है ? किसानों से बात करने की पहल प्रधानमंत्री को करनी चाहिए और तीनों कृषि कानूनों को तत्काल रद्द करना चाहिए।’’

मनीषा अविनाश ब्रजेन्द्र

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