गांधीनगर, 28 फरवरी गुजरात में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) पर राज्य में अनुसूचित जनजातियों के साथ अन्याय के खिलाफ संघर्ष के बहाने अलगाववाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
राज्य के संसदीय एवं विधायी कार्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने विधानसभा में कहा कि देश ने दिल्ली में आप की "अलगाववाद की राजनीति" देखी है और यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी राष्ट्रीय राजधानी में सत्ता से बाहर हो गई।
इससे पहले, बजट सत्र की शुरुआत में सदन में राज्यपाल के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए, आप विधायक एवं आदिवासी नेता चैतर वसावा ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और स्वतंत्रता के बाद महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद गुजरात में आदिवासियों को हाशिये पर रखा जा रहा है।
नर्मदा जिले के डेडियापाडा का प्रतिनिधित्व करने वाले वसावा ने कहा, ‘‘हालांकि नर्मदा का पानी उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र तक पहुंच गया है, लेकिन सरदार सरोवर बांध के पास रहने वाली कई जनजातियां अभी भी परियोजना के लिए दी गई जमीन का मुआवजा पाने के लिए आंदोलन कर रही हैं।’’
आप के एकमात्र आदिवासी विधायक ने भाजपा सरकार पर पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम के साथ-साथ संविधान की 5वीं अनुसूची को ठीक से लागू नहीं करने का आरोप लगाया, जो आदिवासियों को कुछ अधिकारों की गारंटी देता है।
बाद में उन्होंने सदन में एक मांग रखी, लेकिन जनजातीय विकास मंत्री कुबेर डिंडोर की आपत्ति के बाद उपसभापति जेठाभाई भारवाड ने उनके शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया।
डिंडोर ने कहा, ‘‘वसावा के शब्दों को हटाया जाना चाहिए क्योंकि वे अलगाववाद को बढ़ावा देते हैं। वह आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। वह किस अन्याय की बात कर रहे हैं? हमारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी आदिवासी समुदाय से हैं।’’
मंत्री ऋशिकेश पटेल ने अपने जवाब में कहा कि वसावा की मांग दुर्भाग्यपूर्ण है, खासकर तब जब राष्ट्रपति मुर्मू गुजरात दौरे पर हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश की व्यवस्था की बदौलत एक आदिवासी महिला भी सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हो सकती है। इसके अलावा, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने, जब वे मुख्यमंत्री थे, राज्य में आदिवासियों को कई लाभ देने के लिए एक व्यवस्था बनाई थी।’’
पटेल ने आरोप लगाया कि जब आप गुजरात में आदिवासी वोटों को एकजुट करने में विफल रही, तो उसने राज्य में अलगाववाद की राजनीति शुरू कर दी।
उन्होंने कहा, ‘‘अब आप किसी भी तरह से गुजरात में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है। वे अब आदिवासियों के उत्थान की बात कर रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि सरकार के कई शीर्ष अधिकारी अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप ऐसी मांग करके आदिवासियों के विकास को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही है।’’
पिछले साल नवंबर में वसावा ने एक नया संगठन 'भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा' शुरू करने की घोषणा की थी और कहा था कि अगर सरकार आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास का समर्थन करने में विफल रही तो वे अलग 'भील प्रदेश' राज्य के लिए आंदोलन करेंगे।
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