देश की खबरें | गोबर से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ता एक गांव

रायपुर, 28 जून छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले के गौपालक किसानों ने मिलकर एक गांव की तस्वीर बदल दी है। जैविक खाद, बिजली और दूध के मामले में यह गांव आत्मनिर्भर बन रहा है।

राजधानी रायपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर खैरखूंट गांव में गोबर गैस संयंत्र, गोधन और ग्रामीणों की वजह से यह बदलाव आया है।

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धरसीवां विकासखंड का यह गांव कुछ महीने पहले अन्य गांवों की तरह ही था। लेकिन, राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड के सहयोग से लगे गोबर गैस संयंत्र ने गांव को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ा दिया है।

छत्तीसगढ़ राज्य दुग्ध सहकारी संघ के अध्यक्ष रसिक परमार ने बताया कि लगभग दो हजार की आबादी वाले खैरखूंट गांव में ज्यादातर गौपालक किसान हैं। यहां लगभग प्रत्येक घर में गाय हैं और अधिकतर किसान दुग्ध सहकारी संघ से जुड़े हुए हैं।

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परमार ने बताया,‘‘ तय किया गया कि किसी एक गांव का चुनाव कर वहां के किसानों से गाय का गोबर खरीदा जाए और गोबर गैस संयंत्र की स्थापना की जाए। संयंत्र से किसानों के घरों में रसोई गैस पहुंचाने की व्यवस्था हो जिससे वे इसका सस्ते ईंधन की तरह इस्तेमाल कर सकें।’’

उन्होंने कहा कि खैरखूंट गांव में एक किसान ने अपनी डेढ़ एकड़ जमीन भी इस संयत्र के लिए दे दी। इसके कुछ महीनों बाद ग्रामीण विकास का खैरखूंट मॉडल बनकर तैयार हो गया।

परमार ने बताया कि यह मॉडल राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड की राष्ट्रीय डेरी योजना के चरण-1 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य दुग्ध सहकारी संघ ने तैयार किया है।

दुग्ध संघ के अध्यक्ष ने बताया कि गांव के किसानों से 50 पैसे प्रति किलोग्राम के हिसाब से गोबर लिया जाता है। गांव से प्रतिदिन लगभग 5,000 किलोग्राम गोबर एकत्र किया जाता है। इसके बाद गोबर गैस बनाकर इसे पाइपलाइन के माध्यम से किसानों के घरों में पहुंचा दिया जाता है।

परमार ने बताया कि अभी तक गांव के 130 घरों में रसोई गैस की पाइपलाइन पहुंचाई गई है तथा शाम को एक घंटे गैस दी जा रही है। संयंत्र की क्षमता बढ़ाकर गांव के सभी घरों में रसोई गैस पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक दिन में एक घंटा गैस देने के बदले में प्रति माह 100 रुपये प्रति कनेक्शन शुल्क लिया जा रहा है। इसे गौपालकों द्वारा बेचे गए गोबर के मूल्य में समायोजित कर दिया जाता है।

गोबर की खरीद होने के कारण अब ज्यादातर मवेशियों को घर में ही रखा जा रहा है। इसके अलावा जो मवेशी घर नहीं जा पाते, उन्हें संयंत्र के करीब बने गौठान में रखा जाता है।

खैरखूंट गांव के सरपंच शिव ने कहा कि गांव में जैविक विधि से कीटनाशक का निर्माण किया जाना है। गौठान में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। इस संयंत्र में 20 किलोवाट बिजली का उत्पादन होगा। दुग्ध सोसाइटी का आधुनिकीकरण कर यहां दुग्ध उत्पादों के लिए संयंत्र की स्थापना की जाएगी।

परमार ने बताया कि इस गांव के किसानों ने वैज्ञानिक सोच को अपनाकर महात्मा गांधी के ग्राम विकास के सपने को पूरा करने की कोशिश शुरू कर दी है।

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