चेन्नई, दो दिसंबर तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने शनिवार को दावा किया कि एक केंद्रीय जांच एजेंसी से निकटता का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें तीन महीने तक कथित तौर पर धमकी दी।
अप्पावु ने इस मुद्दे पर अधिक विवरण देने से इनकार कर दिया। उन्होंने रिश्वतखोरी के आरोप में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय द्वारा शुक्रवार को मदुरै में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक अधिकारी की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से केवल यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों में ‘‘चीजें कैसे चल रही हैं।’’
अप्पावु ने तिरुनेलवेली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे ईडी अधिकारी की गिरफ्तारी के बारे में मीडिया के माध्यम से पता चला। इससे पता चलता है कि केंद्रीय एजेंसियां, विशेष रूप से सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो), ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और आयकर कैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों में नेताओं और व्यापारियों को अपने मध्यस्थों के माध्यम से निशाना बनाते हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसी का करीबी होने या उसका प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें धमकियां भी दीं।
अप्पावु ने कहा, ‘‘वह एक केंद्रीय एजेंसी के नाम पर तीन महीने से मुझे धमकियां दे रहा है। मुझे उसे चेतावनी देनी पड़ी कि वह मुझ पर यह तरकीब ना आजमाए क्योंकि मैं स्पष्टवादी हूं और ईश्वर मेरा ध्यान रखेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बिचौलिये से कहा कि यदि वह मेरे जैसे किसान को धमकी देने के लिए नीचे गिर सकता है, तो अन्य लोगों की क्या दुर्दशा होगी।’’
उन्होंने कहा कि बिचौलिये ने उन्हें भूमिगत होने और अपना मोबाइल नंबर बदल लेने को भी कहा था। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैंने दृढ़ता से मना कर दिया।’’
प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी अंकित तिवारी को एक सरकारी कर्मचारी से 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने थूथुकुडी में संवाददाताओं से कहा कि किसी व्यक्ति की गलती के लिए पूरे विभाग को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। अन्नामलाई ने कहा, ‘‘रिश्वत लेने के लिए इस तरह की गिरफ्तारी कोई अनोखा मामला नहीं है। इसी तरह की गिरफ्तारियां राजस्थान, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में भी की गई थीं। डीवीएसी अधिकारियों ने जाल बिछाया और उसे पकड़ लिया। लेकिन किसी एक व्यक्ति की गलती के लिए पूरे प्रवर्तन निदेशालय को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।’’
उन्होंने पूछा कि यदि किसी पुलिसकर्मी ने गलती की है तो क्या पूरे तमिलनाडु पुलिस विभाग को दोषी ठहराया जा सकता है।
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