विदेश की खबरें | सूडान में शांति के लिए लंदन में विश्व भर के राजनयिकों की बैठक आयोजित की गई
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इस संघर्ष में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और 1.4 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं।

अफ्रीकी संघ ने ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय संघ के साथ एक दिवसीय सम्मेलन की सह-मेजबानी की।

अफ्रीकी संघ ने ‘‘शत्रुता को तत्काल समाप्त करने’’ का आह्वान किया। लेकिन ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने स्वीकार किया कि शांति बहाल करने में समय लगेगा, नये सिरे से अंतरराष्ट्रीय प्रयास करने और ‘‘धैर्यपूर्ण कूटनीति’’ की आवश्यकता होगी।

बैठक का मुख्य उद्देश्य शांति वार्ता करना नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के सबसे खराब मानवीय संकट से निजात दिलाना था।

इसमें पश्चिमी देशों, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और पड़ोसी देशों के अधिकारी शामिल हुए, लेकिन सूडान से कोई भी नहीं आया था। न तो सूडानी सेना और न ही उसके प्रतिद्वंद्वी अर्धसैनिक बल को आमंत्रित किया गया, जिसके साथ वह लड़ाई लड़ रहा है।

विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि लगभग 2.5 करोड़ लोग -- सूडान की आधी आबादी -- भुखमरी का सामना कर रही है।

राहत सहायता एजेंसी ऑक्सफैम ने कहा कि इस मानवीय आपदा के एक क्षेत्रीय संकट का रूप लेने का खतरा है तथा लड़ाई पड़ोसी देशों तक फैल सकती है।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्रालय की राजनीतिक मामलों की सहायक मंत्री लाना नुसेबेह ने कहा कि दोनों पक्ष अत्याचार कर रहे हैं, और उन्होंने लड़ाकों से स्कूलों, बाजारों और अस्पतालों पर अंधाधुंध गोलाबारी रोकने की अपील की।

एपी

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