मुंबई, 14 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर 63 मून्स टेक्नोलॉजी नामक कंपनी ने सीबीआई को पूर्व वित्तमंत्री पी चिंदबरम और दो अन्य के खिलाफ पद के कथित दुरुपयोग को लेकर कंपनी की शिकायत पर चल रही जांच में तेजी लाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
जिगनेश शाह इस कंपनी के प्रवर्तक हैं और इसे पहले फिनेंशियल टेक्नोलॉजिस लिमिटेड के नाम से जाना जाना जाता था। कंपनी द्वारा चार जुलाई को दायर याचिका में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नौकरशाह केपी कृष्णन एवं रमेश अभिषेक के खिलाफ जांच में कथित देरी किए जाने पर सवाल उठाया गया है।
उल्लेखनीय है कि अभिषेक वायदा बाजार आयोग के अध्यक्ष थे जबकि कृष्णन वित्त मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एवं संयुक्त सचिव पद पर थे और उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे।
नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) में करोड़ों रुपये के भुगतान घोटाला सामने आने के बाद 63 मून्स ने 15 फरवरी 2019 को सीबीआई के समक्ष दर्ज शिकायत में कंपनी को हुए नुकसान और ओहदे का दुरुपयोग करने के मामले में तीनों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की।
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कंपनी ने 20 जून 2019 को उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अनुरोध किया कि अदालत सीबीआई को मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दे।
अगस्त 2019 में सीबीआई ने अदालत को बताया कि शिकायत का सत्यापन करने के बाद में मामले की जांच शुरू की जाएगी।
याचिका में कंपनी ने कहा कि मार्च 2020 को उसने सीबीआई को पत्र लिखकर जांच की स्थिति जाननी चाही। बाद में उन्हें सूचित किया गया कि शिकायत को मुख्य सतर्कता अधिकारी को भेजा गया है क्योंकि इसकी मंजूरी देने के वह सक्षम प्राधिकार है।
याचिकाकर्ता ने कहा, ‘‘चार महीने बीत जाने के बावजूद इस सिलसिले में सीबीआई की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई। सीबीआई प्राथमिकी दर्ज करने में असफल रही है।’’
कंपनी ने चिदंबरम और अन्य दो पर आरोप लगाया कि वर्ष 2012-13 में एनएसईएल घोटाला सामने आने के बाद उन्होंने उनके खिलाफ ‘‘दुर्भावनापूर्ण और निहित स्वार्थ के तहत’’ कार्रवाई की।
न्यायालय की खंडपीठ ने 10 जुलाई को मामले को सुनवाई के लिए 17 जुलाई को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
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