कोलकाता, 26 जून दार्जिलिंग पहाड़ियों में गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) और उत्तर बंगाल में सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद के लिए चुनाव के तहत रविवार को मतदान शांतिपूर्ण रहा तथा क्रमश 57 प्रतिशत और 78.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।
दार्जिलिंग पहाड़ियों को नियंत्रित करने वाली अर्द्ध-स्वायत्त परिषद 'जीटीए' के लिए एक दशक के बाद चुनाव करवाए गए।
उन्होंने बताया कि जीटीए के लिए मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ था और शाम चार बजे तक जारी रही जबकि सिलीगुड़ी में मतदान शाम पांच बजे समाप्त हुआ।
एक अधिकारी ने कहा, ''मतदान शांतिपूर्ण रहा और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। जीटीए में करीब 57 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद में 78.30 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान प्रतिशत अभी थोड़ा ऊपर जा सकता है क्योंकि मतदाता अभी भी पंक्तियों में खड़े हैं।’’
2011 से अस्तित्व में आये 'जीटीए' में कुल 45 सीटें हैं। ये कलिम्पोंग जिले और दार्जिलिंग जिले के हिस्सों में फैली हुई है। 922 केंद्रों पर मतदान हुआ जिनमें से पांच की पहचान अति संवेदनशील केंद्रों के रूप में की गई थी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अलावा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम), गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) जैसे पारंपरिक पहाड़ी दलों ने अर्ध-स्वायत्त परिषद चुनावों का बहिष्कार किया है।
हाल के निगम चुनावों में दार्जिलिंग नगर पालिका पर कब्जा करने वाली नवगठित हमरो पार्टी जीटीए की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
जीजेएम प्रमुख बिमल गुरुंग ने कहा, ‘‘हमने जीटीए चुनावों का बहिष्कार किया है क्योंकि यह पहाड़ के लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। यहां के लोग जीटीए का समर्थन नहीं करते हैं। इस बार मतदान प्रतिशत कुछ महीने पहले निकाय चुनावों के दौरान दर्ज किए गए मतदान प्रतिशत से काफी कम रहेगा।''
जीजेएम ने 2012 के पहले और एकमात्र जीटीए चुनावों में सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। राज्य की मांग को लेकर हिंसक आंदोलन के कारण 2017 में चुनाव नहीं हो सके थे। राज्य नियुक्त प्रशासनिक निकाय ने परिषद की बागडोर संभाली थी।
जीएनएलएफ के पूर्व नेता अजय एडवर्ड्स द्वारा बनाई गई हमरो पार्टी, पहाड़ियों में एक नई राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है। एडवर्ड्स ने कहा, ‘‘हमें जीटीए चुनाव जीतने का भरोसा है।’’
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