नयी दिल्ली, 20 मार्च देश के छह प्रमुख शहरों में करीब एक-तिहाई कार्यालय स्थल हरित भवन का प्रमाणन हासिल कर चुके हैं। संपत्ति सलाहकार सीबीआरई ने यह जानकारी दी।
सीबीआरई ने कहा कि दरअसल रियल एस्टेट डेवलपर अब अपनी परियोजनाओं में वहनीयता या टिकाऊपन के पहलू पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
‘भारतीय रियल एस्टेट ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक एवं शासन) परिदृश्य एवं सतत भविष्य की दिशा में प्रगति’ शीर्षक की रिपोर्ट में सीबीआरई ने छह प्रमुख शहरों (दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुण, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई) में कार्यालय स्थलों का आकलन किया और इस तरह इन शहरों में हरित प्रमाणित इमारतों की स्थिति का पता लगाया।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘2021 की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में प्रमाणित हरित कार्यालय स्थल 177 प्रतिशत बढ़कर 21.2 करोड़ वर्गफुट हो गए, जो 2011 में आठ करोड़ वर्गफुट थे।’’
सीबीआरई ने कहा कि बीते एक दशक में हरित रियल एस्टेट संपत्तियां बहुत तेजी से बढ़ी हैं और कुल कार्यालय स्थलों में उनकी हिस्सेदारी 2011 के 24 प्रतिशत से बढ़कर 2021 में 31 फीसदी हो गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 से 2016 की अवधि की तुलना में बीते पांच साल में प्रमाणित इमारतों की आपूर्ति 37 प्रतिशत बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘यह दिखाता है कि भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र ईएसजी सिद्धांतों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को लेकर और जागरूक हो रहा है और अपनी संपत्तियों में वहनीयता को शामिल करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।’’
सीबीआरई के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘‘सीबीआरई की कारोबार रणनीति का अहम हिस्सा है ईएसजी।’’
कार्यालय स्थलों के क्षेत्र में काम करने वाली सभी प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियां जैसे डीएलएफ, प्रेस्टीज, एम्बैसी समूह, गोदरेज प्रॉपर्टीज, मैक्रोटेक डेवलपर्स, के राहेजा समूह, हिन्स इंडिया और मैक्स एस्टेट्स पर्यावरण संबंधी पहलुओं पर विशेष ध्यान दे रही हैं और उन्हें एलईईडी या भारतीय हरित भवन परिषद की ओर से हरित प्रमाण-पत्र मिले हैं।
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