देश की खबरें | 2जी घोटाला मामला : सीबीआई ने आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर दलीलें देना शुरू किया

नयी दिल्ली, 22 मई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिसंबर 2017 में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा समेत अन्य व्यक्तियों और कंपनियों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली अपनी याचिका को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में दलीलें देनी शुरू कीं।

संघीय जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि निचली अदालत का फैसला ‘गलत निष्कर्ष’ पर आधारित है और ‘कानून की दृष्टि से अस्थिर’ है।

हालांकि सीबीआई ने पहले ‘‘अपील के लिए अनुमति’’ के मुद्दे पर अपनी दलीलें पूरी कर ली थीं, लेकिन अब न्यायाधीश बदलने के कारण मामले पर नए सिरे से बहस हो रही है।

‘‘अपील के लिए अनुमति’’ उच्च न्यायालय में किसी फैसले को चुनौती देने के लिए एक अदालत द्वारा एक पक्ष को दी गई औपचारिक अनुमति है।

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने निर्देश दिया कि मामले को मंगलवार को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए और कहा कि अपील आंशिक रूप से सुनी गई थी और पहले इसे दैनिक आधार पर सूचीबद्ध करने के लिए कहा गया था।

सीबीआई के वकील ने कहा कि मामला अनियमितताओं के ‘‘पांच बिंदुओं’’ से संबंधित है - सरकारी अधिकारियों और दूरसंचार ऑपरेटरों के बीच संबंध, कट-ऑफ का निर्धारण, पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत का उल्लंघन, प्रविष्टि शुल्क में संशोधन न करना और 200 करोड़ रुपये का वित्तीय लेन देन।

उन्होंने कहा कि आरोपियों के अवैध कार्यों से सरकारी खजाने को 22,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा धन शोधन से जुड़े एक मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर एक याचिका भी अदालत के समक्ष लंबित है।

आर. के. चंदोलिया सहित कुछ बरी हुए लोगों की ओर से पेश अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने कहा कि अगर एक आरोपी को उक्त अपराध के लिए बरी कर दिया जाता है, तो वही फैसला धन शोधन मामले में भी पालन करना पड़ता है।

इससे पहले, मामले की सुनवाई दैनिक आधार पर न्यायमूर्ति बृजेश सेठी कर रहे थे, जो 30 नवंबर, 2020 को सेवानिवृत्त हो गए।

विशेष अदालत ने सीबीआई मामले में स्वान टेलीकॉम (प्राइवेट) लिमिटेड, यूनिटेक वायरलेस (तमिलनाडु) लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, फिल्म निर्माता करीम मोरानी और कलैगनार टीवी के निदेशक शरद कुमार को भी बरी कर दिया था।

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