नयी दिल्ली, 22 अगस्त सरकारी विभाग 27 मामलों में भ्रष्ट अधिकारियों को दंडित करने की केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की सलाह से सहमत नहीं हैं। इनमें अकेले रेल मंत्रालय से जुड़े अधिकतम सात मामले शामिल हैं। एक आधिकारिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सीवीसी की सलाह पर अमल न करने के तीन मामले सीसी (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े हैं, जबकि भारतीय स्टेट बैंक, कोयला मंत्रालय और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के दो-दो मामलों में कार्रवाई के सीवीसी के आदेश की अनदेखी की गयी है।
सीवीसी की 2022 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा एक-एक मामला दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड, दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी), कपड़ा मंत्रालय, बर्ड ग्रुप ऑफ कंपनीज, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (आईडीबीआई) से जुड़ा था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, वीओ चिदंबरम पोर्ट अथॉरिटी और भारत संचार निगम लिमिटेड द्वारा सीवीसी की सलाह का पालन न करने का एक-एक मामला सामने आया है।
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) अधिनियम, 2003 की धारा आठ(एक)(जी) के तहत आयोग अपने कार्यों और शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार द्वारा संचालित निगमों, सरकारी कंपनियों, सोसाइटीज और स्थानीय प्राधिकरणों को सलाह देता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोग यह सलाह किसी विशेष मामले से संबंधित सभी तथ्यों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड की तर्कसंगत समीक्षा के आधार पर देता है, जो संबंधित संगठन द्वारा उसके ध्यान में लाये जाते हैं।
हाल ही में सार्वजनिक की गई रिपोर्ट के अनुसार, सीवीसी ने पाया है कि वर्ष 2022 में आयोग की सलाह पर अमल न करने के कुछ मामले हैं।
विवरणों का उल्लेख करते हुए, इसमें कहा गया है कि तत्कालीन वरिष्ठ मंडल अभियंता (सीनियर डीईएन) अतिरिक्त मंडल रेलवे प्रबंधक (एडीआरएम) से प्राप्त शिकायतों की जांच करने में विफल रहे। रिपोर्ट के अनुसार, इतना ही नहीं एक कंपनी के प्रामाणिक दस्तावेजों की सही तरीके से जांच करने में भी वह विफल रहे, जिसका नतीजा यह निकला कि फर्जी कागजातों के आधार पर उस कंपनी के साथ अनुबंध किया गया।
आयोग ने बड़ा जुर्माना लगाने की सलाह दी थी, लेकिन रेलवे बोर्ड ने मामूली जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘अनुशासनात्मक प्राधिकार यानी रेलवे बोर्ड द्वारा केवल मामूली जुर्माना लगाना आयोग की सलाह से विचलन है।’’
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘हालांकि, आयोग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अधिकारियों के कुछ मामलों में, या तो आयोग के साथ निर्धारित परामर्श तंत्र का पालन नहीं किया गया, या संबंधित अधिकारियों ने आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की।’’
रिपोर्ट में एक अन्य उदाहरण का हवाला देते हुए यह भी कहा गया है कि भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों द्वारा एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) जारी करने में अनियमितताएं देखी गईं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘बैंक को अनुमानित नुकसान 22.04 करोड़ रुपये था। सभी पांच अधिकारियों पर बड़ा जुर्माना लगाने के बाद, अपीलीय समिति ने जुर्माने को संशोधित कर दिया।’’
इसमें कहा गया है कि अपीलीय समिति द्वारा बड़े जुर्माने को निंदा के छोटे जुर्माने में ‘संशोधित’ करना आयोग की सलाह से एक बड़ा विचलन है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायतों के निपटारे के विभिन्न स्तरों के साथ-साथ सक्षम अधिकारियों द्वारा निर्णय लेने के स्तर पर भी कुछ देरी देखी गई है।
इसमें कहा गया है कि आयोग का निरंतर प्रयास संगठनों को शिकायतों के समय पर और कुशल निपटारे के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ संगठन सीवीसी की सलाह परर अमल करने में निर्धारित अवधि से अधिक समय लेते हैं, जिसमें आरोप पत्र जारी करने में देरी भी शामिल है।
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