नयी दिल्ली,16 सितंबर दिल्ली की एक अदालत ने उत्तरपूर्व दिल्ली में 2020 में हुए दंगे से जुड़े एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि आरोप संगीन हैं तथा जुर्म साबित होने पर इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
अदालत ने कहा कि इस बात की भी आशंका है कि आरोपी मामले के गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचाला ने 15 सिंतबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘ आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मैं इस चरण में याचिकाकर्ता को जमानत का पात्र नहीं समझता,इसलिए अर्जी खारिज की जाती है।’’
अदालत आरोपी रंजीत सिंह राणा की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। राणा पर दंगाइयों की उस भीड़ का हिस्सा होने का आरोप है जिसने 24 फरवरी 2020 को करावल नगर इलाके में शिकायतकर्ता अब्दुल पर हमला किया और उसके दोपहिया वाहन को आग के हवाले कर दिया था।
अभियोजन के अनुसार भीड़ से एक व्यक्ति ने शिकायतकर्ता पर तलवार से हमला किया,जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और इसके बाद कई लोगों ने उस पर हमला किया, उससे 2,500 रुपये लूट लिए और उसे मरने के लिए छोड़ कर चले गए।
अदालत ने कहा, ‘‘ इस मामले में शिकायतकर्ता अब्दुल ने तस्वीर के जरिए याचिकाकर्ता की पहचान की और इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि इस घटना में आरोपी रंजीत सिंह राणा के खिलाफ कोई सुबूत नहीं है।’’
करावल नगर पुलिस थाने ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया था।
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