चेन्नई, 23 मई मद्रास उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस से पीड़ित एक डॉक्टर की मृत्यु के बाद उन्हें दफनाए जाने का विरोध करने वाले 12 आरोपियों को शनिवार को जमानत दे दी।
इसके साथ ही अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने इस संबंध में अपनायी जाने वाली सावधानियों के बारे में अग्रिम रूप से सूचित नहीं किया।
अदालत ने कहा कि आरोपियों ने अपने इलाके में कोरोना वायरस फैलने के डर से 55 वर्षीय न्यूरोसर्जन को दफनाए जाने का विरोध किया। अगर अधिकारियों ने सावधानियों के बारे में पहले ही सूचित कर दिया होता तो वे लोग ऐसा नहीं करते।
न्यायमूर्ति एम निर्मल कुमार ने मामले के 12 आरोपियों को जमानत दे दी।
भीड़ ने 20 अप्रैल को डॉक्टर के दफनाए जाने का विरोध किया था और उसने निगम के स्वास्थ्य कर्मचारियों और मृतक डॉक्टर के सहयोगियों पर भी हमला किया था।
डॉक्टर की पत्नी और बेटे को भी हिंसा के कारण वहां से हटना पड़ा था।
इस मामले में एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
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