नयी दिल्ली, छह अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत की विकास जरूरतें तो सर्वोपरि है हीं लेकिन वन्यजीव एवं जैवविविधता भी उतनी ही जरूरी है।
मोदी ने वर्तमान वन्यजीव सप्ताह के मौके पर देश के नाम अपने संदेश में कहा, ‘‘वन्यजीव संरक्षण हमारे नैतिक मूल्यों में समाहित है और वह सदैव हमारी परंपरा एवं संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। हमारे पावन संविधान में भी वनों एवं वन्यजीवों के संरक्षण को हर भारतीय के मौलिक दायित्वों के रूप में शामिल करते हुए इस दर्शन को जगह दी गयी है।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘भारत में विश्व की 17 फीसद जनसंख्या रहती है और यहां दुनिया का 2.4 फीसद भूक्षेत्र है। देश के विकास की जरूरतें सर्वोपरि तो हैं ही लेकिन वन्यजीव एवं जैवविविधता भी उतनी ही जरूरी है। ’’
उन्होंने कहा कि संरक्षित क्षेत्रों के मजबूत एवं व्यापक नेटवर्क के साथ भारत की वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता हमेशा की तरह दृढ है।
मोदी ने कहा, ‘‘पारिस्थितिकी रूप से संवदेनशील क्षेत्र हमारे राष्ट्रीय उद्यानों एवं अभयारण्यों के चारों ओर से सहयोग प्रदान करते हैं और वे बफर के रूप में काम करते है। इस दशा में लंबी छलांग लगाते हुए कई ऐसे क्षेत्र वन्यजीवों को फलने-फूलने के वास्ते उपलब्ध जगह में वृद्धि के लिए अधिसूचित किये गये हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारत विविध प्रकार के प्रवासी पंछियों के लिए प्राकृतिक आवास है और इसी वजह से इस साल फरवरी में 13 वें प्रवासी प्रजाति संधिपक्ष सम्मेलन में अंगीकार किये गये गांधीनगर घोषणापत्र में ‘2020 के बाद की वैश्विक जैवविविधता के प्रारूप में’ पारिस्थितिकी कनेक्टिविटी की अवधारणा के समेकन पर बल दिया गया है।
उन्होंने इस संबंध में एशियाटिक शेर और बाघ का जिक्र किया ।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, ‘‘ हम जैवविविधता को समृद्ध बनाने के साथ साथ टिकाऊ विकास के लिए एकल उपयोग वाले प्लास्टिक और माइक्रो प्लास्टिक प्रदूषण घटाने के अपने प्रयासों के प्रति कृत संकल्प हैं।’’
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