जर्मनी के एक नए सर्वे के अनुसार जर्मन मतदाता ईरान पर अमेरिका-इस्राएल हमलों और मध्य पूर्व की स्थिति के वैश्विक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं. अमेरिका पर जर्मन लोगों का भरोसा कम हो गया है.ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के भारी हवाई हमलों और ईरानी शासन के कड़े प्रतिरोध ने मध्य पूर्व को आपातकाल की स्थिति में धकेल दिया है. जर्मनी के सार्वजनिक टीवी चैनल एआरडी के नए सर्वे 'डॉयचलांड ट्रेंड' के अनुसार, तीन-चौथाई जर्मन लोग वैश्विक स्थिति से खतरा महसूस करते हैं और बेहद चिंतित हैं.
अमेरिका-इस्राएल के सैन्य अभियान का जर्मनी में व्यापक रूप से विरोध हुआ है. दस में से छह यानी 60 फीसदी जर्मन इस हमले को गलत मानते हैं. हालांकि, यह संख्या जनवरी 2026 में वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों और 2003 में इराक पर हमले की तुलना में काफी कम है. सर्वे के अनुसार, 72 फीसदी जर्मनों ने वेनेजुएला पर हमले से नाराजगी जताई और 80 फीसदी ने 2003 के इराक युद्ध को गलत माना था. इस सर्वे के लिए इंफ्राटेस्ट-डीमैप ने 2 से 4 मार्च के बीच 1,317 चुनिंदा जर्मन मतदाताओं से बात की.
वामपंथी जर्मन मतदाता कर रहे हैं युद्ध का विरोध
ईरान में युद्ध के प्रति मतदाताओं की राय ज्यादातर उन राजनीतिक दलों की सोच के अनुसार बंटी हुई दिख रही है. दक्षिणपंथी एएफडी और कंजर्वेटिव सीडीयू/सीएसयू के केवल 48 फीसदी मतदाता इस हमले के खिलाफ हैं. हालांकि, मध्यमार्गी-वामपंथी पार्टियों के मतदाताओं में यह संख्या 82 फीसदी तक है.
जर्मनी के लोग इस युद्ध के परिणामों को लेकर बेहद चिंतित हैं. सर्वे में शामिल लोगों में से तीन-चौथाई को डर है कि यह लड़ाई दूसरे देशों में भी फैल सकती है. दस में से आठ लोग वैश्विक व्यापार पर मध्य पूर्व युद्ध के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने फारस की खाड़ी में होर्मुज जलमार्ग को बंद कर दिया है, जिससे कई तेल टैंकर फंसे हुए हैं. तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं, जिसका असर जर्मनों को पेट्रोल पंपों पर भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोल की कीमतें 2 यूरो प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार गई हैं.
सर्वे में शामिल दस में से सात लोगों ने ईरान के लोगों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है. नागरिकों का एक बड़ा बहुमत डरता है कि दुनिया भर में जारी सैन्य संघर्षों को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय कानून पर "जिसकी लाठी, उसकी भैंस” का सिद्धांत हावी हो रहा है.
जर्मनी के लिए अच्छा पार्टनर कौन
अमेरिका और रूस सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शक्तियों पर जर्मनों का भरोसा अब पहले से भी कम है. जनवरी से अब तक केवल 15 प्रतिशत लोग अमेरिका को जर्मनी का भरोसेमंद पार्टनर मानते हैं, जबकि सिर्फ 12 प्रतिशत लोग रूस को भरोसे के लायक समझते हैं. इस्राएल को भी अधिकांश जर्मन शंका की नजर से देखते हैं. दस में से करीब सात लोग इस्राएल को जर्मनी का विश्वसनीय पार्टनर नहीं मानते. यूक्रेन के बारे में राय विभाजित है. दस में से चार लोग यूक्रेन पर भरोसा करते हैं, जबकि लगभग आधे उसकी विश्वसनीयता पर संदेह करते हैं. दूसरी ओर, फ्रांस और ब्रिटेन को अधिकांश लोग भरोसेमंद पार्टनर मानते हैं.
वैश्विक स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता जर्मनी के लोगों में खतरे की धारणा को भी बदल रही है. फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले की शुरुआत में, आधे से थोड़े अधिक लोगों ने कहा था कि वैश्विक स्थिति जर्मन सुरक्षा के लिए खतरा है. वर्तमान में, तीन-चौथाई से अधिक लोग ये राय रखते हैं.
जर्मन सरकार भी चिंतित
जर्मन सरकार के लिए पश्चिम एशिया के हालात पहले से ही तनाव वाली स्थिति में एक अतिरिक्त बोझ है. जर्मनी की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, जिससे सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. यदि ईरान में युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बहुत नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. इसका असर जर्मनी पर भी पड़ेगा.
सीडीयू/सीएसयू और मध्यमार्गी-वामपंथी एसपीडी की गठबंधन सरकार को सत्ता में आए दस महीने हो गए हैं. चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स (सीडीयू) ने जर्मन जनता से वादा किया था कि उनकी सरकार में कई चीजें बेहतर होंगी. लेकिन अब तक कोई सुधार नजर नहीं आया है. यह नागरिकों को निराश कर रहा है.
केवल कंजर्वेटिव पार्टी के समर्थक ही सरकार के काम से संतुष्ट हैं. कुल मिलाकर, सर्वे के मुताबिक तीन-चौथाई लोग नाराज हैं. ये आंकड़े पिछली गठबंधन सरकार से ज्यादा बेहतर नहीं हैं. एसपीडी, ग्रीन और फ्री डेमोक्रैटिक पार्टी की गठबंधन सरकार तीन साल बाद ही टूट गई थी.
नए चुनाव में मैर्त्स को बहुमत नहीं
यदि इस हफ्ते संसदीय चुनाव हो, तो सत्ताधारी पार्टियों को बहुमत नहीं मिलेगा. इस समय सीडीयू/सीएसयू को 28 फीसदी (+2), एसपीडी को एक अंक गिरकर 14 फीसीदी, एएफडी को 23 फीसदी (-1), ग्रीन पार्टी को 13 फीसदी (+1) और वामपंथी लेफ्ट पार्टी को 9 फीसदी (-1) लोगों का समर्थन है. कोई और पार्टी जर्मन संसद बुंडेसटाग में पहुंचने के लिए जरूरी 5 प्रतिशत मतों की सीमा पार नहीं कर पाएगी.
यह लेख मूल रूप से जर्मन में लिखा गया था.













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