नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर वायुसेना के प्रमुख एअर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने सोमवार को कहा कि भारत ने देश की रक्षा शक्ति में वृद्धि के लिए भविष्य की सैन्य प्रणालियों के स्वदेशी विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिनमें ऊर्जा निर्देशित अस्त्र-शस्त्र प्रणाली, मानव के विकल्प वाले युद्ध मंच और ‘स्वार्म ड्रोन’ जैसी प्रणालियां शामिल हैं।
आगामी आठ अक्टूबर को वायुसेना दिवस से पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भदौरिया ने यह भी कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक अत्याधुनिक मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) के लिए 2027 का लक्ष्य तय किया है।
उन्होंने कहा कि भारत पांचवीं पीढ़ी के मध्यम वजन वाले और काफी दूरी तक मार करने वाले लड़ाकू विमान के विकास के लिए पांच अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम कर रहा है जिससे देश की हवाई शक्ति महत्वपूर्ण रूप से बढ़ेगी।
भदौरिया ने कहा, ‘‘भविष्य के लिए, हमने छठी पीढ़ी की प्रौद्योगिकी के साथ स्वदेशी लड़ाकू प्रणालियां विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसमें ऊर्जा निर्देशित अस्त्र-शस्त्र, स्मार्ट विंगमैन अवधारणा, मानव के विकल्प के रूप में लड़ाकू मंच, स्वार्म ड्रोन, हाइपरसोनिक अस्त्र इत्यादि शामिल हैं।’’
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ऊर्जा निर्देशित अस्त्र-शस्त्र भविष्य के समाधान हैं जिनमें लक्षित हमले करने के लिए उच्च ऊर्जा वाली लेजर और माइक्रोवेव का इस्तेमाल किया जाता है। ‘स्वार्म ड्रोन’ मानवरहित विमान या हवाई रोबोट का समूह हैं जो विशिष्ट लक्ष्यों पर हमले कर सकते हैं।
मानव के विकल्प वाले लड़ाकू मंच अगली पीढ़ी के लड़ाकू वाहन हैं जो कृत्रिम बुद्धि युक्त दिशा-निर्देशक प्रणाली से चलते हैं और ये मिशन को बेहद सटीकता से अंजाम देते हैं।
भदौरिया ने यह भी कहा कि वायुसेना नयी रक्षा खरीद प्रक्रिया के प्रावधानों के तहत हवा के बीच में विमानों में ईंधन भरने वाले विमान पट्टे पर लेने पर भी विचार कर रही है।
पूर्व में, वायुसेना ने बीच हवा में ईंधन भरने वाले कम से कम छह विमान खरीदने की योजना बनाई थी।
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