मुम्बई, 16 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जेल प्रशासन से हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे तीन अभियुक्तों की आपात पेरोल अर्जियों पर विचार करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति एस एस शिंदे की अगुवाई वाली पीठ कोरोना वायरस महामारी के चलते जेलों में भीड़ कम करने के लिए पेरोल पर कैदियों को रिहा करने के, राज्य की उच्चाधिकार प्राप्त समिति के आदेश के आलोक में मिलिंद पाटिल और दो अन्य की एक याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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पाटिल और दो अन्य अभियुक्त तब उच्च न्यायालय पहुंचे जब कोरोना वायरस के आधार पर आपात पेरोल देने की उनकी अर्जियां जेल अधीक्षक ने खारिज कर दी।
याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार की पेरोल एवं अवकाश नियमावली प्रावधान करती है कि यदि किसी कैदी को पहले दो बार आपात पेरोल दिया जा चुका है और वह पेरोल समाप्त होने पर उचित ढंग से लौट आया हो तब ऐसे व्यक्ति को फिर आपात पेरोल दिया जा सकता है।
जेल प्रशासन ने कहा कि पाटिल ने चार साल पहले दोषी करार दिये जाने के बाद से बस एक बार आपात पेरोल लिया था। ऐसे मे वह नियम के तहत पेरोल का पात्र नहीं है जबकि अन्य दो याचिकाकर्ताओं में एक को एक ही बार आपात पेरोल मिला है एवं दूसरे ने तो कभी इसके लिए आवेदन ही नहीं दिया था।
पीठ ने कहा कि नियमों की ऐसी व्याख्या मूर्खतापूर्ण है।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘ आपात पेरोल देते समय यह देखना होता है कि जेल में भीड़ कम हो लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होता है कि कोई आदतन अपराधी या कैदी , जो फरार हो सकता है, उसे आपात पेरोल नहीं मिले। ’’
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