दिल्ली, 16 जुलाई बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने मंगलवार को कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिये जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल, डीजल आदि) पर आयात निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करने की जरूरत है।
सिंह ने यह भी कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा और उसमें संतुलन बिठाने वाली ऊर्जा एक बार लागत प्रभावी यदि हो जाती है तो तापीय बिजली और जीवाश्म ईंधन देश के ऊर्जा संसाधनों के लिहाज से बीते दिनों की बात हो जायेंगे।
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संतुलन ऊर्जा (बैलेसिंग एनर्जी) का उपयोग बिजली उत्पादन में अनियोजित उतार-चढ़ाव या लोड में घट-बढ़ से निपटने के लिये पारेषण व्यवस्था के सुचारू रूप से चलाने में किया जाता है।
उद्योग मंडल सीआईआई के नवीकरणीय ऊर्जा विनिर्माण को लेकर आत्मनिर्भर भारत पर आयोजित डिजिटल सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘आत्मनिर्भर भारत का वास्तविक दृष्टिकोण जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता को शून्य स्तर पर लाना है।’’
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भारत की कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भरता को देखते हुए मंत्रालय का बयान महत्वपूर्ण है।
उद्योग मंडल ने सिंह के हवाले से एक बयान में कहा, ‘‘भारत लगातार बोलियों को लेकर नई सोच पर काम करता रहा है। हम नवीकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण पर बोली लेकर आये।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार दूसरे बोली विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इसमें 24 घंटे ग्रिड एनर्जी, तापीय बिजली द्वारा संतुलन, पनबिजली द्वारा संतुलन। इसका मकसद भंडारण के लिये मांग को बढ़ाना है और कीमतों में कमी लाना है।’’
सिंह ने कहा कि नवीकणीय ऊर्जा की दर को नीचे लाने के लिये भंडारण को व्यवहारिक बनाने की जरूरत है, पनबिजली में तेजी लानी होगा, देश में विनिर्माण को बढ़ाना होगा और बैटरी को सस्ता बनाने की जरूरत है।
मंत्री ने कहा, ‘‘परिवहन के लिये हाइड्रोजन अगली बड़ी चीज हो सकती है। इसके साथ बैटरी भी है। यह समझने की जरूरत है कि कौन सा आर्थिक रूप से व्यवहारिक है। हाइड्रोजन और बैटरी को लेकर शहर आधारित अलग-अलग रुख अपनाया जाएगा ताकि इन विकल्पों की लागत प्रभाविता को आंका जा सके।’’
सिंह ने कहा कि सरकार अगली पीढ़ी के सौर उत्पादों के विनिर्माण पर जोर दे रही है। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण में तेजी की उम्मीद जतायी।
पवन ऊर्जा के मामले में ज्यादातर उपकरण स्वदेशी हैं जबकि सौर क्षेत्र में 80 से 90 प्रतिशत उपकरणों का आयात किया जाता है।
उन्होंने मौजूदा मुद्दों को भी रेखांकित किया जिसका सरकार समाधान करने की कोशिश कर रही हैं। इसमें पूरी मूल्य श्रृंखला के लिये भुगतान सुरक्षा, अनुबंध का पालन, जमीन अधिग्रहण और नियामकीय मसले शामिल हैं।
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