POK में फिर उबाल? Gen Z ने पाक सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) एक बार फिर उथल-पुथल में है. कुछ ही सप्ताह पहले जहां आर्थिक मुद्दों को लेकर बड़े स्तर पर हिंसक आंदोलन देखने को मिला था, वहीं अब शिक्षा सुधारों को लेकर शुरू हुआ जनरेशन Z का विरोध आंदोलन तेजी से सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल चुका है.
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) एक बार फिर उथल-पुथल में है. कुछ ही सप्ताह पहले जहां आर्थिक मुद्दों को लेकर बड़े स्तर पर हिंसक आंदोलन देखने को मिला था, वहीं अब शिक्षा सुधारों को लेकर शुरू हुआ जनरेशन Z का विरोध आंदोलन तेजी से सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल चुका है. इस बार छात्र ही आंदोलन की कमान थामे हुए हैं और उनका गुस्सा साफ झलक रहा है.
मुजफ़्फराबाद में बढ़ती फीस और मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया था. लेकिन तभी स्थिति तब बिगड़ गई जब एक अज्ञात शख्स ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चला दी, जिसमें एक युवक घायल हो गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, जिसने छात्रों के आक्रोश को और भड़का दिया. देखते ही देखते आंदोलन हिंसक हो गया. टायर जलाए गए, तोड़फोड़ हुई और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई.
क्यों भड़के छात्र? शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
POK के छात्रों की मुख्य शिकायतें इस समय शिक्षा सुधारों को लेकर हैं.
- डिजिटल ‘e-marking’ सिस्टम लागू होने के बाद छात्रों के रिजल्ट में बड़ी गड़बड़ी सामने आई. कई छात्रों को उन विषयों में पास घोषित कर दिया गया जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं!
- रिजल्ट घोषित करने में भी 6 महीने की देरी हुई जिससे छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया.
- दोबारा जांच कराने के लिए 1500 रुपये प्रति विषय की भारी फीस—सात विषयों वाले छात्र को 10,500 रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं.
- सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, खराब स्वास्थ्य सुविधाएँ और परिवहन की दिक्कतें भी छात्रों की नाराजगी को बढ़ा रही हैं.
JAAC का समर्थन और आंदोलन का बढ़ता दायरा
छात्रों के आंदोलन को अब ज्वाइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) का समर्थन मिला है, जिसने पिछले माह हुए व्यापक प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था. तब आंदोलन 30 मांगों, जैसे—टैक्स राहत, बिजली-आटा पर सब्सिडी, और विकास परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर हुआ था. उस समय दमन के लिए फायरिंग की गई, जिसमें 12 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई थी. सरकार ने अंततः समझौता किया, लेकिन जनता का भरोसा टूट चुका है और गुस्सा शांत नहीं हुआ.
दक्षिण एशिया में युवा नेतृत्व वाली क्रांति की लहर
POK में उठ रही यह आग केवल स्थानीय नहीं है. नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ युवा आंदोलन सरकार गिरा चुका है. बांग्लादेश में छात्र विरोध भगवती आंदोलन में बदल गया था. श्रीलंका में आर्थिक संकट ने सत्ता परिवर्तन का रास्ता खोल दिया.
इन उदाहरणों से साफ है कि दक्षिण एशिया में Gen Z भ्रष्टाचार और शासन की नाकामियों के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभा रही है.
POK में हालिया छात्र विरोध एक बड़ी कहानी की शुरुआत हो सकता है. छात्र केवल मार्किंग सुधार नहीं चाहते. वे व्यवस्था में पारदर्शिता, अधिकार और सम्मान की मांग कर रहे है.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 06, 2025 05:29 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

