जापान को अक्टूबर 2025 में अपनी पहली महिला प्रधानमंत्री मिलीं और संसद में चुन कर आई महिलाओं की संख्या भी बढ़ी. लेकिन सत्र शुरू होने से पहले महिला सांसदों को शौचालय के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है.जापान में हुए आखिरी आम चुनाव के बाद जापानी संसद में पहले से अधिक महिला नेता चुन कर आईं. अक्टूबर में देश को सनाए ताकाइची के रूप में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री मिल गईं. लेकिन संसद का सत्र शुरू होने से पहले महिला सांसदों को शौचालय के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है. आखिरी बार 2024 में कराए गए आम चुनावों में संसद के 465 सदस्यीय निचले सदन की 73 सीटें महिलाओं ने जीतीं. जबकि डायट कहलाने वाली जापानी संसद के ऊपरी सदन में 248 में 74 महिलाएं चुन कर आईं.
जापानी राजनीति अब भी बड़े पैमाने पर पुरुष प्रधान बनी हुई है. आम चुनावों के दौरान भी कई महिला उम्मीदवारों को अक्सर लैंगिक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है. किसी फब्ती में उन्हें राजनीति में सक्रिय होने के बजाए घर पर रहकर बच्चों की देखभाल करने की सलाह दी गई तो कभी बुरी लगने वाली कोई और बात सुनाई गई.
इस संसद भवन का निर्माण सन 1936 में हुआ था, जबकि जापान में महिलाओं को वोट देने का अधिकार ही सन 1945 में जाकर मिला. ऐसे में हैरानी नहीं कि निचले सदन में चुनी गई 73 महिला सांसदों के लिए मुख्य सदन के पास सिर्फ दो केबिन वाला एक ही शौचालय है. जापानी सरकार का लक्ष्य है कि संसद की कम से कम 30 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं हों.
संसद में शौचालयों को लेकर याचिका
संसद भवन में ज्यादा शौचालयों की मांग को लेकर दी गई याचिका पर प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची सहित करीब 60 महिला सांसदों के हस्ताक्षर हैं. इसमें संसद में महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी के अनुरूप सुविधाएं बढ़ाने की मांग की गई है. प्रधानमंत्री ताकाइची ने पहले अपने मंत्रिमंडल में नॉर्डिक देशों जैसा लैंगिक संतुलन लाने की बात कही थी. लेकिन अंत में उन्होंने 19 सदस्यीय कैबिनेट में सिर्फ दो अन्य महिलाओं को शामिल किया.
पीएम ताकाइची का कहना है कि महिलाओं के शौचालयों की बढ़ती मांग प्रगति का संकेत है, लेकिन यह जापान में लैंगिक समानता की कमी को भी दिखाती है. वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की 'ग्लोबल जेंडर गैप' रिपोर्ट में जापान इस साल 148 देशों में 118वें स्थान पर रहा.
कैसी है जर्मनी, अमेरिका और भारत में स्थिति
जर्मन संसद बुंडेसटाग में महिला सांसदों के लिए शौचालय सुविधाएं काफी हद तक संतुलन में हैं. समय के साथ महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने के साथ इनमें सुधार किया गया. जर्मनी के संसद प्रशासन ने इस जरूरत को संस्थागत जिम्मेदारी के तौर पर देखा और सुविधा का विस्तार किया.
अमेरिकी कांग्रेस में भी महिला सांसदों की संख्या बढ़ने के बाद शौचालय और अन्य सुविधाओं को लेकर सुधार किए गए. हालांकि, पुरानी ऐतिहासिक इमारत होने के कारण वहां भी शुरुआती दौर में असंतुलन बना रहा. लेकिन अब कैपिटल हिल में महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं मौजूद हैं.
भारत में ट्रांसजेंडर कर रहे अलग टॉयलेट की मांग
वहीं, भारत की संसद में महिला सांसदों की संख्या अब भी सीमित है. 2023 में जिस नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ उसमें महिलाओं के लिए शौचालय और विश्राम कक्षों जैसी सुविधाओं को पहले से बेहतर बनाया गया है. फिर भी लैंगिक समानता के लिहाज से इसमें भी सुधार की गुंजाइश है.












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