Singapore: 'Omegle' पर मिली दो नाबालिगों से दुष्कर्म मामले में युवक को सजा, कोर्ट ने कहा- ‘अनियंत्रित यौन आदतों के कारण किया अपराध’
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Photo)

सिंगापुर: इंटरनेट पर अनजान लोगों से बात कराने वाले प्लेटफॉर्म 'ओमेगल' (Omegle) के जरिए नाबालिगों (Minor) को जाल में फंसाकर उनका यौन शोषण (Sexual Exploitation) करने के एक बेहद गंभीर मामले में सिंगापुर (Singapore) की अदालत ने अपना फैसला सुनाया है. अदालत ने "अनियंत्रित यौन आदतों" से ग्रस्त एक २० वर्षीय युवक को १३ और १४ वर्ष की दो नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने के जुर्म में 'रिफॉर्मेटिव ट्रेनिंग' (सुधारगृह में सख्त अनुशासन और काउंसिलिंग) की सजा सुनाई है.

दोषी युवक ने अदालत के समक्ष दुष्कर्म के दो मामलों और अपनी १७ वर्षीय ममेरी बहन की कुछ बेहद निजी तस्वीरें अवैध रूप से अपने पास रखने का दोष स्वीकार कर लिया है. पीड़ितों की सुरक्षा और पहचान गोपनीय रखने के कानूनी नियमों के तहत दोषी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है. यह भी पढ़ें: Leicestershire Viral Video: फेरिस व्हील के शीशे वाले केबिन में संबंध बना रहा था कपल, नीचे खड़ी हजारों की भीड़ ने बनाया वीडियो; पुलिस तलाश में जुटी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे फंसाया जाल में

अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, यह घटनाक्रम वर्ष २०२३ का है. दोषी युवक ने सबसे पहले 'ओमेगल' ऐप के जरिए १३ वर्षीय पहली पीड़िता से संपर्क साधा था. लड़की की कम उम्र और इस कृत्य के गैर-कानूनी होने की जानकारी होने के बावजूद उसने पीड़िता को बहला-फुसलाकर उसकी कुछ आपत्तिजनक वीडियो मंगवाईं और बाद में मुलाकात तय की. जून २०२३ में दोनों सिंगापुर के सेरांगून इलाके में मिले और वहां से एक रिहायशी ब्लॉक (HDB) की सीढ़ियों के पास ले जाकर आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया.

इसी तरह, आरोपी ने उसी प्लेटफॉर्म पर १४ वर्षीय दूसरी पीड़िता को भी अपना शिकार बनाया. फरवरी २०२३ में आरोपी ने उसे मिलने के लिए बुलाया और एक अन्य रिहायशी ब्लॉक की सीढ़ियों के पास ले जाकर उसके साथ भी दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया. बता दें कि 'ओमेगल' ऐप को नाबालिगों के यौन शोषण और ग्रूमिंग को बढ़ावा देने के आरोपों के बाद नवंबर २०२३ में दुनिया भर में स्थायी रूप से बंद कर दिया गया था.

फोन की जांच में हुआ एक और बड़ा खुलासा

इस पूरे मामले का खुलासा जुलाई २०२३ में तब हुआ जब पहली पीड़िता की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने जब आरोपी को हिरासत में लेकर उसके मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की, तो उसमें उसकी १७ वर्षीय ममेरी बहन की दो अत्यंत निजी तस्वीरें बरामद हुईं.

जांच में पता चला कि फरवरी २०२३ में दक्षिण कोरिया की एक पारिवारिक यात्रा के दौरान, एक ही कमरा साझा करने का फायदा उठाकर आरोपी ने गुप्त रूप से ये तस्वीरें खींची थीं. आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने ये तस्वीरें केवल अपनी विकृत मानसिकता की संतुष्टि के लिए रखी थीं और इन्हें किसी अन्य के साथ साझा नहीं किया था.

अदालत की टिप्पणी और रिफॉर्मेटिव ट्रेनिंग का आदेश

जिला न्यायाधीश शैफुद्दीन सरुवान ने फैसले की प्रति में उल्लेख किया कि भले ही इस मामले में शारीरिक बल या जबरदस्ती के सीधे सबूत नहीं हैं, लेकिन पीड़ित लड़कियां अपनी कम उम्र के कारण निर्णय लेने में सक्षम नहीं थीं और आरोपी ने जानबूझकर उनकी मासूमियत का फायदा उठाया है.

अदालत की रिपोर्ट में सामने आया कि आरोपी महज ७ साल की उम्र से ही इंटरनेट पर अत्यधिक अश्लील सामग्री (Pornography) देखने का आदी था, जिसने उसकी "अनियंत्रित यौन आदतों" और प्रो-क्रिमिनल मानसिकता को बढ़ावा दिया. हालांकि, न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आरोपी ने बिना किसी बहानेबाजी के अपनी पूरी गलती स्वीकार की है और सुधार के प्रति इच्छा जताई है, इसलिए उसे सामान्य जेल के बजाय सुधरने के लिए सख्त रिफॉर्मेटिव ट्रेनिंग सेंटर भेजा जा रहा है.