ईरान और अमेरिका समझौते के रास्ते से क्यों भटक गए?
अमेरिका और ईरान ने जून में जिस अंतरिम समझौते पर दस्तखत किए थे वह इन देशों के ताजा बैर से खतरे में पड़ गया है.
अमेरिका और ईरान ने जून में जिस अंतरिम समझौते पर दस्तखत किए थे वह इन देशों के ताजा बैर से खतरे में पड़ गया है. मध्यपूर्व में अब शांति बहाली की प्रक्रिया कहां अटक गई?होर्मुज जलडमरुमध्य और दूसरे मुद्दों पर अमेरिका और ईरान की असहमतियां जिस तरह से सामने आई हैं उससे यह साफ है कि स्थाई शांति की उम्मीदें तुरंत पूरी होने नहीं जा रही हैं.
14 बिंदुओं वाले इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के कारण ईरान युद्ध रुका था और व्यापारिक जहाजों के लिए होर्मुज का रास्ता खोल दिया गया था. लेकिन विश्लषकों का कहना है कि कई बिंदुओं पर इसके शब्द स्पष्ट नहीं थे. ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य जैसे कठिन विषयों को दूसरे दौर की बातचीत के लिए छोड़ दिया गया था.
समझौते पर दोनों देश क्या कह रहे हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते कहा कि शुरुआती युद्धविराम समझौता "खत्म" हो गया. ट्रंप का कहना है कि जिन बातों पर सहमति बनी थी, ईरानी अधिकारी उनका पालन नहीं कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका संभवतया होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कर लेगा.
ईरान युद्ध के लक्ष्यों में डॉनल्ड ट्रंप को क्या हासिल हुआ
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागेई ने सोमवार को अमेरिका पर समझौते को "संकट में" डालने का आरोप लगाया. ईरान के मुताबिक अमेरिका ने लगातार अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है.
मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से अपनी प्रतिबद्धता का पालन करने का अनुरोध किया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य का क्या मामला है?
28 फरवरी को अमेरिका और इस्राएल के ईरान पर हमले से ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है.
एमओयू के आर्टिकल 5 में कहा गया है कि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू होगी, ईरान अपनी पूरी कोशिशों से फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक और विपरीत दिशा में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा और 60 दिनों तक इसके लिए कोई शुल्क नहीं लेगा.
तेहरान ने इसका मतलब निकाला कि अमेरिका इस पूरे जलमार्ग के प्रबंधन के लिए ईरान के अधिकार को मान्यता देता है, हालांकि दो महीने के लिए यह काम बिना किसी शुल्क या टोल के होगा.
अमेरिका और खाड़ी के देशों ने इस व्याख्या को खारिज कर दिया और उनका कहना है कि इसमें लिखी बात का मतलब सिर्फ इतना है कि ईरान को जहाजों के लिए यात्रा सुगम बनाना चाहिए और ताकत के बल पर इसमें कोई बाधा नहीं डालनी चाहिए.
अमेरिका का कहना है कि यह मार्ग शुल्क से मुक्त रहेगा. पिछले हफ्ते ईरान ने कुछ जहाजों पर फायरिंग की और कहा कि उन्होंने जलमार्ग के एक ऐसे रूट पर जाने की कोशिश की जिसकी मंजूरी नहीं दी गई है. इसके बाद उन्होंने रास्ता फिर से बंद कर दिया.
अमेरिकी नौसेना के जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर ने रविवार को कहा कि जलडमरूमध्य में दक्षिणी रूट उपलब्ध है और दोनों तरफ से आने जाने के लिए इसका विस्तार किया जा रहा है.
ईरान को तेल बेचने के लिए मिली छूट का क्या हुआ?
एमओयू का आर्टिकल 10 कहता है कि अमेरिका ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात की छूट देगा. इनमें बैंकों के जरिए लेनदेन, बीमा और परिवहन शामिल हैं. ईरान के लिए यह बड़ी जीत थी. सालों से चले आ रहे प्रतिबंधों से उसकी अर्थव्यवस्था का दम घुट रहा है.
हालांकि 7 जुलाई को अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने की छूट देने वाला लाइसेंस वापस ले लिया और यह चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की कार्रवाई "पूरी तरह अस्वीकार्य" है और इसके परिणाम भुगतने होंगे. ईरान ने इस कदम की निंदा की और इसे एमओयू का उल्लंघन कहा.
ईरान की जब्त संपत्तियों का क्या हुआ?
आर्टिकल 11 कहता है कि अमेरिका ईरान की "जब्त या प्रतिबंधित धन और संपत्तियों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराएगा" और बातचीत के दौरान ईरान और अमेरिका इस धन को मुक्त करने से जुड़ी प्रक्रिया पर सहमति बनाएंगे.
इन संपत्तियों में कतर के बैंक खातों में जमा 6 अरब अमेरिकी डॉलर भी शामिल हैं. कतर ने 30, जून को कहा था कि उसने यह धन ईरान को नहीं दिया है.
22 जून को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि मुक्त किए जाने के बाद भी अमेरिका और कतर का उस धन पर नियंत्रण होगा. उन्होंने यह भी कहा कि यह धन अमेरिकी मक्का, सोया और गेहूं पर खर्च हो सकता है. इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र के जिनीवा कार्यालय में तैनात ईरान के राजदूत अली बाहरेनी ने कहा कि उस पैसे का इस्तेमाल कैसे होगा इसका फैसला सिर्फ ईरान करेगा.
लेबनान इसमें कहां फिट होगा?
ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने 8 जुलाई को लेबनान में हुए इस्राएली हमले को एमओयू का उल्लंघन बताया.
लेबनान इस संघर्ष में तब पड़ा जब ईरान समर्थित हिज्बुल्ला ने 2 मार्च को इस्राएल के खिलाफ हमले शुरू कर दिए. इसके बाद इस्राएल ने दक्षिणी लेबनान में घुस कर हमला बोल दिया. ईरान ने मांग की थी कि इस्राएल का लेबनान में युद्ध रोकना इस समझौते का हिस्सा होगा.
इस परिस्थिति में बातचीत अब किस हाल में है?
एमओयू कहता है कि अमेरिका और ईरान 60 दिन के भीतर अंतिम समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हालांकि आपसी सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है. हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर एक दूसरे से होड़ ले रहे दोनों पक्षों ने आगे की बातचीत के लिए कोई तारीख नहीं बताई है.
ईरान को दुनिया के ताकतवर देशों के साथ 2015 का परमाणु समझौता करने में कई साल लगे थे. डॉनल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में उस समझौते से बाहर निकल गए.
कार्नेगी मिडिल ईस्ट सेंटर थिंक टैंक के मोहानाद हागे अली कहते हैं, "एमओयू संकट में है और अगर शांति बहाली के लिए यही आधार हो तो इसे बहाल करने के लिए अब एक नए समझौते की जरूरत है. अस्पष्टता ने दिखाया है कि मुद्दे कठिन थे और समझौता नाजुक था."
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 15, 2026 12:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

