Patna High Court: सलवार उतारने और महिला का सीना दबाने को रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता, यह शीलभंग का मामला- पटना हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष के आरोपों को पूरी तरह सही भी मान लिया जाए, तब भी आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 354 (महिला की मर्यादा भंग करना) का मामला बनता है. अदालत ने कहा कि महिला को कमरे में बंद करना, उसकी सलवार उतारने की कोशिश करना और उसका सीना दबाना महिला की मर्यादा भंग करने के उद्देश्य से बल प्रयोग (Criminal Force) करने के समान है.
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी महिला की सलवार उतारने की कोशिश करना और उसका सीना दबाना अपने आप में रेप की कोशिश (Attempt to Rape) साबित नहीं करता. अदालत ने कहा कि ऐसे कृत्य महिला की मर्यादा भंग (Outraging Modesty) करने के अपराध की श्रेणी में आते हैं, न कि रेप की कोशिश के. यह टिप्पणी कोर्ट ने एक व्यक्ति को रेप की कोशिश के मामले में दोषमुक्त (Acquit) करते हुए की.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2008 का है. शिकायत के मुताबिक, एक महिला अपने पिता के साथ अमरपुर स्थित एक फोटो स्टूडियो में तस्वीर खिंचवाने गई थी. आरोप था कि फोटो लेने के बाद स्टूडियो संचालक ने महिला के पिता को बाहर इंतजार करने के लिए कहा और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया. इसके बाद उसने कथित तौर पर महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसका सीना दबाया. महिला की चीख सुनकर उसके पिता मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया. मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376/511 (रेप की कोशिश) और 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) के तहत दोषी ठहराया था.
Removing woman’s salwar, pressing her chest amounts to outraging modesty, not attempt to rape: Patna High Court
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— Bar and Bench (@barandbench) July 14, 2026
हाईकोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?
न्यायमूर्ति पूर्णेंदु सिंह की एकल पीठ ने मामले के साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा की. अदालत ने पाया कि रेप की कोशिश के आरोप का समर्थन करने के लिए कोई मेडिकल साक्ष्य मौजूद नहीं था. साथ ही, जांच अधिकारी (Investigating Officer) की गवाही भी ट्रायल के दौरान नहीं हुई थी. कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने रेप करने की दिशा में ऐसा स्पष्ट और निर्णायक कदम उठाया था, जिसे कानून के तहत Attempt to Rape माना जा सके.
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष के आरोपों को पूरी तरह सही भी मान लिया जाए, तब भी आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 354 (महिला की मर्यादा भंग करना) का मामला बनता है. अदालत ने कहा कि महिला को कमरे में बंद करना, उसकी सलवार उतारने की कोशिश करना और उसका सीना दबाना महिला की मर्यादा भंग करने के उद्देश्य से बल प्रयोग (Criminal Force) करने के समान है.
फिर भी आरोपी क्यों हुआ बरी?
हालांकि कोर्ट ने माना कि आरोपी के कृत्य धारा 354 के तहत अपराध बनाते हैं, लेकिन उसे इस धारा के तहत न तो आरोपित किया गया था और न ही ट्रायल चलाया गया था. चूंकि अभियोजन पक्ष रेप की कोशिश का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर पाया, इसलिए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया. साथ ही अदालत ने आरोपी द्वारा जमा किया गया जुर्माना वापस करने का भी आदेश दिया.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 14, 2026 07:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

