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जर्मनी में जोर पकड़ता शांति आंदोलन

जर्मनी की जनता विश्व युद्ध में हुए जान और माल के नुकसान को अब तक भुला नहीं पाई है.

जर्मनी में जोर पकड़ता शांति आंदोलन
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी की जनता विश्व युद्ध में हुए जान और माल के नुकसान को अब तक भुला नहीं पाई है. इसलिए जर्मनी में कई शहरों में फिर युद्ध विरोधी प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं. क्या यह एक बड़ा आंदोलन बन पाएगा?13 सितंबर को बर्लिन में ब्रांडेनबुर्ग गेट के सामने दस हजार से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए. इन लोगों को साथ लाई युद्ध विरोधी भावना. ये लोग गाजा में युद्ध रोकने के लिए अपनी आवाज उठा रहे थे. यूक्रेन में रूसी युद्ध भी इसका एक और कारण रहा. अगले कुछ हफ्तों में जर्मनी में बड़े पैमाने पर युद्ध-विरोधी प्रदर्शन होने वाले हैं. इस युद्ध-विरोधी भावना के पीछे कई वजहें छिपी हैं.

प्रदर्शन में मशहूर लोग शामिल

प्रदर्शन में कई मशहूर कलाकार और नेता भी शामिल हुए. प्रमुख वक्ता सारा वागेनक्नेश्ट थीं, जो इस प्रदर्शन की आयोजक और एक राजनीतिक दल की संस्थापक हैं. उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार को खाड़ी देशों और यूक्रेन में शांति वार्ता को जोरों शोरों से समर्थन देना चाहिए. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि जर्मनी किसी भी युद्ध में हथियारों की आपूर्ति ना करे.

सारा वागेनक्नेश्ट ने डीडब्ल्यू को बताया, "हम सब यहां इसलिए हैं क्योंकि हम इस दुनिया के अमानवीय युद्धों के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं. हम हमास द्वारा किए गए नरसंहार और बंधक बनाए जाने की हरकत की भी निंदा करते हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि हमास का 7 अक्टूबर 2023 को किया गया हमला किसी भी तरह से गाजा में बीस लाख लोगों को मारने, भूखा रखने और विस्थापित करने का हक नहीं दे देता, खासकर जिनमें से आधे बच्चे हैं.

शांति आंदोलन का इतिहास और आज की स्थिति

क्या यह एक नए शांति आंदोलन की शुरुआत हो सकती है जो आम लोगों को एक मकसद के तहत संगठित करे? जर्मनी का इतिहास इसके कई उदाहरण देता है. 1980 के दशक में परमाणु युद्ध के डर से करीब 50,000 लोग पश्चिमी जर्मनी के बॉन शहर के होफगार्टन पार्क में इकट्ठे हुए थे. 2003 में भी इराक युद्ध के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे थे.

शांति और संघर्ष पर शोधकर्ता यानिस ग्रिम का कहना है कि आगे जाकर एक नए और शक्तिशाली आंदोलन की संभावना तो है, लेकिन फिलहाल यह बिखरा हुआ है. विभिन्न पहलें और गठबंधन उभर रहे हैं, लेकिन अभी तक इनका कोई सीधा लक्ष्य नजर नहीं आ रहा. उन्होंने कहा, "यह इराक युद्ध या पुराने शांति आंदोलनों से अलग है. फिलहाल यह थोड़ा विभाजित है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह आगे नहीं बढ़ सकता.”

सारा वागेनक्नेश्ट इस आंदोलन की सबसे प्रमुख और विवादित हस्ती हैं. यूक्रेन युद्ध के एक साल बाद उन्होंने एक प्रदर्शन आयोजित किया था, जिस पर कुछ लोगों ने उन पर रूस और वहां के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बहुत ज्यादा सहानुभूति रखने का आरोप लगाया. इस बार भी उनके प्रदर्शन को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी के सह-संस्थापक यान फान आकेन ने डीडब्ल्यू से कहा, "मेरा मानना है कि राजनीतिक कामों में जितने ज्यादा लोग हों, उतना बेहतर है. केवल कुछ नामों पर जोर देने से, मेरे हिसाब से, राजनीतिक काम नहीं होते.”

जवानों की भागीदारी और अनिवार्य सैन्य सेवा

यूक्रेन युद्ध के बाद से ही जर्मनी में युवाओं को युद्ध और सैन्य सेवा के मुद्दों पर जागरूक करना अब एक प्रमुख विषय बन गया है. आकेन खुद 1980 के शांति आंदोलन का हिस्सा रहे हैं. लेकिन उन्हें भी ऐसा लगता है कि एक चीज जो युवाओं को आज साथ ला सकती है वो है अनिवार्य सैन्य सेवा.

वह कहते हैं, "यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है जिसकी वजह से सभी नौजवान एकजुट होकर सड़कों पर साथ उतरेंगे और इसका विरोध करेंगे.” बड़ी बात तब होगी, जब आंदोलन ऑनलाइन स्क्रीनों से हटकर असल में सड़कों पर आ जाएगा. फिलहाल एक ऑनलाइन याचिका दायर हुई है जिसे किसी नौजवान पुरुष ने शुरू किया. उसमें साफ साफ लिखा है : "बिना नौजवानों की मर्जी के कोई भी अनिवार्य सैन्य सेवा नहीं हो सकती.”

26 सितंबर यानी कल तक, इस याचिका पर 70,000 लोगों ने हस्ताक्षर कर दिए थे.

प्रदर्शन और प्रतीकात्मक दिन

3 अक्टूबर को जर्मनी के एकीकरण की वर्षगांठ है. इसी दिन दो हिस्सों, पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी, में बंटा यह देश एक हो गया था. इस दिन बर्लिन और श्टुटगार्ट में एक साथ कई बड़े कार्यक्रम होंगे. चार सौ से अधिक संस्थाएं, संगठन और दल इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं. नारा है, "नेवर अगेन रेडी फॉर वॉर! लेट्स स्टैंड अप फॉर पीस”, यानी फिर कभी युद्ध नहीं! आइए शांति के लिए खड़े हों!”

यह नए शांति आंदोलन का संकेत है कि जर्मनी में अब केवल युद्ध विरोधी विचार ही नहीं, बल्कि सक्रिय प्रदर्शन और आंदोलन भी बढ़ रहे हैं. लोग चाहते हैं कि सरकार केवल शक्ति और हथियारों पर भरोसा ना करे, बल्कि सहयोग और संवाद की राह अपनाए. युवा, कलाकार और नेता, सभी अब एक साझा उद्देश्य के लिए साथ आ रहे हैं.

जर्मनी में यह नई शांति लहर धीरे-धीरे समाज और राजनीति पर असर डाल रही है. लोग यह समझ रहे हैं कि सच्ची सुरक्षा केवल सेना में नहीं, बल्कि शांति, बातचीत और समाज के विकास में है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंदोलन कितनी दूर तक जनता को जोड़ पाता है और क्या यह जर्मनी में स्थायी शांति के लिए बदलाव ला सकेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 28, 2025 02:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).