UK First Virtual MP: ब्रिटेन में आया देश का पहला 'वर्चुअल सांसद', अब AI करेगा जनता से बात
ब्रिटेन के सांसद मार्क सेवार्ड्स ने अपना AI अवतार लॉन्च किया (Photo : X)

ब्रिटेन में एक सांसद (MP) ने एक अनोखा प्रयोग किया है. उन्होंने लोगों से बातचीत करने के लिए अपना एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) वर्जन बनाया है. यह AI चैटबॉट, जिसे ब्रिटेन का पहला 'वर्चुअल सांसद' कहा जा रहा है, बिल्कुल सांसद की ही आवाज़ में लोगों के सवालों का जवाब देता है, उन्हें सलाह देता है और उनकी समस्याओं को नोट करके सांसद की टीम तक पहुंचाता है.

यह AI सांसद कौन है और क्यों बनाया गया?

यह कदम उठाने वाले सांसद का नाम मार्क सेवार्ड्स है. उनका कहना है कि इस तकनीक का मकसद सांसद और जनता के बीच के रिश्ते को और मज़बूत करना है. इस AI की मदद से लोग अपनी समस्याओं के लिए साल के 365 दिन, 24 घंटे मदद ले सकेंगे.

मार्क सेवार्ड्स का मानना है कि "AI की क्रांति हो रही है और हमें इसे अपनाना होगा, वरना हम पीछे रह जाएँगे." उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे 'AI मार्क' को एक बार आज़माकर ज़रूर देखें. उन्होंने कहा, "इसे समझने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इसमें शामिल हुआ जाए और पहला कदम उठाया जाए. अगर हम एक ऐसा मॉडल बना सकते हैं जो बिना कोई ऊटपटांग बात कहे लोगों की सही में मदद करे, तो यह एक अच्छी बात है."

यह AI लोगों के साथ हुई सारी बातचीत को रिकॉर्ड भी करता है, ताकि बाद में सांसद की टीम यह समझ सके कि उनके क्षेत्र के लोग किन मुद्दों पर सबसे ज़्यादा बात कर रहे हैं.

क्या यह तकनीक अच्छी है या बुरी? उठ रहे हैं सवाल

हालांकि, इस नई तकनीक की आलोचना भी शुरू हो गई है. कई विशेषज्ञों को डर है कि इससे नेता और जनता के बीच का फासला कम होने के बजाय और बढ़ सकता है.

  • जुड़ाव की कमी: डेटा और AI एक्सपर्ट डॉ. सूसन ओमान का कहना है, "खतरा यह है कि सांसद ज़्यादा कुशल बनने की कोशिश में जनता से और दूर हो सकते हैं. इसका उलटा असर यह हो सकता है कि लोगों को लगेगा कि उनकी बात सुनी ही नहीं जा रही है."
  • बुजुर्गों के लिए भ्रम: उन्होंने यह भी चिंता जताई कि पुरानी पीढ़ी के लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि वे किसी बॉट से बात कर रहे हैं या असली इंसान से. इससे वे परेशान हो सकते हैं.
  • भावनात्मक समस्याओं का क्या? एक और एक्सपर्ट विक्टोरिया हनीमैन कहती हैं कि जो लोग गंभीर और भावनात्मक समस्याओं (जैसे- घरेलू या मानसिक परेशानी) के लिए मदद माँग रहे हैं, उन्हें जब एक बॉट से बात करनी पड़ती है, तो उनका दुख और बढ़ सकता है.
  • गलतियों का डर: उनका यह भी मानना है कि चैटबॉट भी इंसानों की तरह गलतियाँ कर सकते हैं, जिससे सांसद पर लोगों का भरोसा कम हो सकता है.

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह AI सिस्टम एक शुरुआती मॉडल (प्रोटोटाइप) है और इसमें ज़रूरत के हिसाब से बदलाव किए जाएँगे. विक्टोरिया हनीमैन का यह भी कहना है कि दुनिया बदल रही है और हमें देखना होगा कि यह प्रयोग कितना सफल होता है. हो सकता है कि कुछ सुधारों के साथ यह सिस्टम ठीक से काम करने लगे.