Mass Pet Abandonment in Dubai: संकट में दुबई, युद्ध के डर से देश छोड़ रहे लोग, सड़कों पर लावारिस छोड़े जा रहे है पालतू जानवर; VIDEO
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण दुबई छोड़ रहे प्रवासी (Expats) अपने पालतू जानवरों को सड़कों और पार्कों में लावारिस छोड़ रहे हैं. रेस्क्यू संस्थाओं ने इसे एक 'अभूतपूर्व' संकट बताते हुए लोगों से पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार करने की अपील की है.
Mass Pet Abandonment in Dubai: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सबसे प्रमुख शहर दुबई में इन दिनों पालतू जानवरों के परित्याग (Abandonment) की एक हृदयविदारक लहर देखी जा रही है. मध्य पूर्व में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और मार्च 2026 में हुए सैन्य हमलों के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी (Expatriates) जल्दबाजी में देश छोड़ रहे हैं. इस अफरा-तफरी के बीच, लोग अपने पालतू कुत्तों को खंभों से बांधकर और बिल्लियों को बक्सों में भरकर लावारिस छोड़ रहे हैं. स्थानीय पशु कल्याण संगठनों ने पिछले 72 घंटों में ऐसे मामलों में 300% की भारी वृद्धि दर्ज की है.
शेल्टर होम में जगह की कमी और 'इमरजेंसी' जैसे हालात
दुबई के 'स्ट्रे डॉग्स सेंटर' और अन्य रेस्क्यू समूहों का कहना है कि स्थिति अब उनके नियंत्रण से बाहर हो रही है. आवासीय परिसरों, पार्किंग गैरेज और रेगिस्तानी इलाकों के बाहरी हिस्सों में महंगे नस्ल के कुत्ते और बिल्लियां छोड़े जा रहे हैं. स्वयंसेवकों ने बताया कि कई जानवर अपने मालिकों के सूटकेस के पास बैठे या उनके लौटने का इंतजार करते हुए पाए गए हैं. यह न केवल एक पशु स्वास्थ्य संकट है, बल्कि शहर के लिए एक मानवीय आपातकाल जैसा बन गया है. यह भी पढ़े: Middle East Conflict: दुबई एयरपोर्ट के पास ईरानी ड्रोन हमला, एक भारतीय सहित 4 घायल; मध्य पूर्व में युद्ध तेज
दुबई में इंसानी संकट
महंगा सफर और कागजी कार्रवाई बनी रुकावट
पशुओं को साथ न ले जाने के पीछे मुख्य कारण अत्यधिक लागत और जटिल नियम हैं. एक पालतू जानवर को दूसरे देश ले जाने का खर्च 3,000 डॉलर (लगभग 2.5 लाख रुपये) से अधिक हो सकता है. इसके अलावा, माइक्रोचिपिंग, रेबीज टाइट्रेशन और निर्यात परमिट की प्रक्रिया में हफ्तों का समय लगता है. मौजूदा तनाव के कारण एयरस्पेस बंद होने के डर से लोग कम समय में निकलना चाहते हैं, जिससे पालतू जानवरों के लिए कार्गो में जगह मिलना लगभग असंभव हो गया है.
आर्थिक और सुरक्षा परिप्रेक्ष्य
मार्च 2026 में सैन्य बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों के बाद कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को निकालने के लिए प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए हैं. फ्लाइट्स में बढ़ती भीड़ और ओवरबुकिंग के कारण पेट-क्रेट्स (Pet Crates) को प्राथमिकता नहीं मिल रही है. स्थिति इतनी खराब है कि कुछ लोगों ने पशु चिकित्सालयों से अपने स्वस्थ पालतू जानवरों को 'इच्छा-मृत्यु' (Euthanasia) देने का अनुरोध किया है, जिसे डॉक्टरों ने नैतिक आधार पर अस्वीकार कर दिया है.
कानूनी परिणाम और सामुदायिक पहल
यूएई के संघीय कानून संख्या 18 (2016) के तहत पालतू जानवरों को छोड़ना एक दंडनीय अपराध है. हालांकि, देश छोड़ चुके लोगों पर इसे लागू करना अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है. इस बीच, दुबई में रुकने वाले नागरिकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से 'फोस्टर नेटवर्क' बनाया है ताकि इन बेसहारा जानवरों को अस्थायी घर मिल सके. ये समूह जानवरों को यूरोप या उत्तरी अमेरिका भेजने के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की तलाश कर रहे हैं.
मदद के लिए अपील
स्थानीय चैरिटी संस्थाओं ने भोजन, क्रेट और दवाओं के लिए दान की अपील की है. उन्होंने निवासियों से आग्रह किया है कि यदि उन्हें देश छोड़ना ही है, तो वे कम से कम 48 घंटे पहले शेल्टर होम से संपर्क करें. जानवरों को सड़क पर छोड़ना न केवल उनके लिए जानलेवा है, बल्कि अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी के कारण यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है.