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राजनीति, खेल और विज्ञान समेत दिनभर की सारी बड़ी खबरें, एक साथ और तुरंत.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

राजनीति, खेल और विज्ञान समेत दिनभर की सारी बड़ी खबरें, एक साथ और तुरंत. हम यह पेज लगातार अपडेट कर रहे हैं. दिनभर की सारी खबरें एक साथ, एक जगह और तुरंत पाने के लिए बने रहें हमारे साथ.- चुनाव आयोग ने दिया राहुल गांधी के आरोपों का जवाब

- यहूदी विरोध का बहाना बनी इस्राएल की आलोचनाः मैर्त्स

- जर्मन समाज बिखराव की ओर बढ़ रहा हैः सर्वे

- पाकिस्तान-सऊदी अरब के बीच बड़ा रक्षा समझौता, एक पर हमला दोनों पर माना जाएगा

-पीएम मोदी ने नेपाल की अंतरिम पीएम सुशीला कार्की से बात की

- ट्रंप की ब्रिटेन यात्रा के दौरान लंदन में विरोध प्रदर्शन

मालेगांव ब्लास्ट केस: हाई कोर्ट ने बरी आरोपियों और एनआईए को नोटिस जारी किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार, 18 सितंबर को 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और बरी किए गए आरोपियों को नोटिस जारी किए. अदालत धमाका पीड़ितों के रिश्तेदारों द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें पूर्व बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया गया था.

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के पास हुए धमाके में छह लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हो गए थे.

31 जुलाई को विशेष अदालत ने ठाकुर, पुरोहित, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, समीर कुलकर्णी, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर धर द्विवेदी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश और हत्या समेत सभी आरोपों से बरी कर दिया था.

पीएम मोदी ने नेपाल की अंतरिम पीएम सुशीला कार्की से बात की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नेपाल की नवनियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की से बात की और पड़ोसी देश में युवाओं के नेतृत्व में हुए जेन जी विरोध प्रदर्शनों के बाद शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयासों के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की.

मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री श्रीमती सुशीला कार्की के साथ गर्मजोशी से बातचीत हुई. हाल ही में हुई दुखद जनहानि पर हार्दिक संवेदना व्यक्त की और शांति स्थिरता बहाल करने के उनके प्रयासों के प्रति भारत के दृढ़ समर्थन की पुष्टि की. साथ ही, मैंने उन्हें और नेपाल की जनता को कल उनके राष्ट्रीय दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं."

कार्की शुक्रवार को नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनी थीं. इससे तीन दिन पहले ही दशकों में सबसे खराब अशांति के बाद केपी शर्मा ओली ने पद से इस्तीफा दे दिया था.

60 फीसदी नदियों का प्रवाह बदलाः रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी का जल चक्र लगातार अस्थिर और अप्रत्याशित होता जा रहा है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन की 2024 की स्टेट ऑफ ग्लोबल वाटर रिसोर्सेज रिपोर्ट के अनुसार, यह लगातार छठा साल था जब जल चक्र असामान्य रहा और लगातार तीसरे साल दुनिया के सभी हिमनद क्षेत्रों में बर्फ का नुकसान दर्ज किया गया.

रिपोर्ट में झीलों, नदियों के प्रवाह, भूजल, मिट्टी की नमी, हिमपात और बर्फ पिघलने सहित मीठे पानी की उपलब्धता और भंडारण का आकलन किया गया. वैज्ञानिकों ने पाया कि 2024 में लगभग 60 फीसदी नदियों का प्रवाह सामान्य से या तो बहुत ज्यादा था या बहुत कम.

डब्ल्यूएमओ के जल एवं हिममंडल प्रभाग के निदेशक स्टेफान उलेनब्रुक ने कहा कि पानी का यह चक्र अब “और अधिक अस्थिर और अनुमान लगाना कठिन” हो गया है. उनका कहना है कि गर्मी बढ़ने से वातावरण अधिक नमी धारण कर सकता है, जिससे या तो लंबे सूखे पड़ते हैं या फिर भीषण वर्षा होती है.

वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप, मध्य अफ्रीका, भारत और चीन में औसत से ज्यादा वर्षा और बाढ़ की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि दक्षिणी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में गंभीर सूखे की स्थिति रही. यूरोप में मार्च तक बर्फ असामान्य रूप से जल्दी पिघल गई, वहीं मध्य एशिया में बर्फ ज्यादा पड़ी और वसंत में बाढ़ का कारण बनी.

ट्रंप की ब्रिटेन यात्रा के दौरान लंदन में विरोध प्रदर्शन

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की अभूतपूर्व दूसरी राजकीय यात्रा के पहले दिन बुधवार को हजारों लोग लंदन की सड़कों पर उतर आए और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने अनुमान लगाया कि करीब 5,000 लोग इस विरोध में शामिल हुए, जो अंत में संसद भवन के सामने रैली में बदल गया. जब ट्रंप को विंडसर कासल में रेड कार्पेट स्वागत मिल रहा था, राजधानी के बीचों-बीच प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया और उनके प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की.

67 वर्षीय पूर्व शिक्षक डेव लॉकिट ने कहा, “हम डॉनल्ड ट्रंप के खिलाफ लगभग हर चीज को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. समझ नहीं आता कि कौन सा पोस्टर उठाएं, क्योंकि नापसंद करने के लिए इतनी बातें हैं. वह पूरी दुनिया में विनाश और अराजकता फैला रहे हैं. अगर ट्रंप के विचार हमारे समाज में घुस गए, तो यह ब्रिटेन में फासीवाद होगा.”

न्यू ग्रीन पार्टी नेता जैक पोलांस्की और कॉमेडियन निश कुमार इस रैली के मुख्य वक्ताओं में थे. पोलांस्की ने कहा, “हम यहां एकजुट होकर यह बताने आए हैं कि यह सब हमारे नाम पर नहीं है. यह वह पल है जब हमें ट्रंप की राजनीति, नफरत और बंटवारे की राजनीति को ठुकराना होगा.”

बीबीसी मुख्यालय से शुरू हुए मार्च में भीड़ ने ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच तख्तियां और झंडे लहराए. कुछ प्रदर्शनकारियों ने 2019 में उड़ाए गए प्रसिद्ध ट्रंप बेबी बलून के छोटे संस्करण भी तैयार किए थे. भारतीय मूल की डॉक्टर याशी श्रीराम ने “जनसंहार खत्म करो, ट्रंप को रोको” लिखा पोस्टर उठा रखा था. उन्होंने कहा, “मैं मुख्य रूप से फलीस्तीन के लोगों के समर्थन में यहां आई हूं.”

राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने दिया जवाब

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कुमार उन लोगों को बचा रहे हैं जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को “नष्ट” किया. राहुल ने कर्नाटक की एक विधानसभा सीट का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस समर्थकों के वोट चुनाव से पहले व्यवस्थित तरीके से हटाए गए.

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग “लोकतंत्र के हत्यारों” की रक्षा कर रहा है औरमतदाता सूचियों से वोटों को हटाने की जानकारी देने से बच रहा है. राहुल गांधी ने कहा, “कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और यूपी में बड़े पैमाने पर वोट डिलीट किए गए. यह वोट चोरी का एक और तरीका है.” उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से एक सप्ताह के भीतर वोट डिलीशन का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की.

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को तुरंत खारिज करते हुए “गलत और बेबुनियाद” बताया. आयोग ने बयान जारी कर कहा कि कोई भी वोट ऑनलाइन डिलीट नहीं किया जा सकता और ऐसा करने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुने जाने का पूरा अधिकार है. आयोग ने बताया कि 2023 में कर्नाटक की अलंद विधानसभा सीट में वोट डिलीशन की असफल कोशिशें हुई थीं, जिसके खिलाफ खुद आयोग की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अलंद सीट 2018 में बीजेपी के सुभाष गुट्टेदार ने और 2023 में कांग्रेस के बी.आर. पाटिल ने जीती थी.

नेपाल में हिंसा के दौरान भागे कैदी कर रहे सरेंडर

नेपाल में 8 सितंबर को सोशल मीडिया पर बैन के खिलाफ हुई हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद जेलों से करीब 13,500 कैदी भाग गए थे. नेपाल पुलिस का कहना है कि इनमें से करीब 5,000 कैदी पकड़ लिए गए हैं. और कुछ ने खुद ही नेपाल पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. नेपाल में हुई हिंसा का सहारा लेकर कई कैदी भारतीय सीमा में दाखिल होने की फिराक में थे लेकिन उन्हें भारतीय सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया. अब भी कई ऐसे कैदी फरार हैं जिनपर गंभीर आरोप है.

नेपाल में भ्रष्टाचार से लड़ेगी अंतरिम सरकार

नेपाल में हिंसा के दौरान 73 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे.

यहूदी विरोध का बहाना बनी इस्राएल की आलोचनाः मैर्त्स

जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने बुधवार को कहा कि जर्मनी में इस्राएल की आलोचना अक्सर यहूदी-विरोधी घृणा फैलाने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल की जा रही है. जर्मनी में यहूदियों की केंद्रीय परिषद की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ पर बोलते हुए मैर्त्स ने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व वाले हमलों और उसके बाद गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से यहूदी-विरोध "हर दिन और ज्यादा तेज, खुला, निर्लज्ज और हिंसक" होता जा रहा है.

उन्होंने कहा, “‘इस्राएल की आलोचना’ और अपराधी-पीड़ित की सबसे भद्दी अदला-बदली, दरअसल यहूदी-विरोध का जहर फैलाने का एक बहाना बनती जा रही है.” जर्मनी, अमेरिका के बाद, इस्राएल का दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है और ऐतिहासिक रूप से होलोकॉस्ट के अपराधबोध के कारण उसने इस्राएल का मजबूत समर्थन किया है. इसे "श्टाट्सराइजन" कहा जाता है.

हालांकि, पिछले महीने जर्मनी ने पहली बार इस्राएल को हथियारों का निर्यात रोक दिया जो गाजा पट्टी में इस्तेमाल हो सकते थे. यह फैसला उस योजना के विरोध में लिया गया था जिसमें इस्राएल गाजा में सैन्य कार्रवाई को और बढ़ाना चाहता था. यह बदलाव जनता और मैर्त्स की सरकार के छोटे गठबंधन सहयोगी के दबाव के बीच आया, क्योंकि गाजा में इस्राएल की नाकेबंदी से खाने और पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई थी.

बर्लिन में अपने भाषण में मैर्त्स ने स्वीकार किया कि इस्राएली सरकार की आलोचना “संभव और आवश्यक” होनी चाहिए, लेकिन चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा, “हमारे देश की आत्मा को चोट पहुंचती है, जब यह आलोचना यहूदी-विरोधी नफरत फैलाने का बहाना बन जाती है, या फिर इस मांग में बदल जाती है कि जर्मनी इस्राएल से मुंह मोड़ ले.”

ताइवान पर चीन की दुनिया को चेतावनी

चीन ने ताइवान और दक्षिण चीन सागर को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अपने आंतरिक मामलों में किसी भी हस्तक्षेप के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है. रक्षा मंत्री दोंग जून ने गुरुवार को बीजिंग में श्यांगशान फोरम के उद्घाटन समारोह में कहा, “दुनिया आज एक और चौराहे पर खड़ी है: शांति या युद्ध, संवाद या टकराव.”

दोंग ने जोर देकर कहा कि ताइवान “अविभाज्य रूप से चीन का हिस्सा” है और पीपल्स लिबरेशन आर्मी “पुनः एकीकरण की रक्षा करने के लिए पर्याप्त रूप से शक्तिशाली” है. उन्होंने कहा कि ताइवान की स्वतंत्रता की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी और चीन किसी भी “बाहरी सैन्य हस्तक्षेप” को नाकाम करने के लिए हमेशा तैयार है.

फिलीपींस सहित कई देशों के साथ संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों को लेकर विवाद का जिक्र करते हुए दोंग ने कहा कि चीन अपनी “क्षेत्रीय संप्रभुता और अधिकारों की रक्षा करेगा.” उन्होंने चेताया कि “पूर्ण सैन्य वर्चस्व की दौड़ और शक्ति ही न्याय है की सोच अंततः जंगल के कानून तक ले जाएगी.”

हाल ही में चीन ने दक्षिण चीन सागर में एक एटोल को प्राकृतिक आरक्षित क्षेत्र घोषित किया है.

जर्मन समाज बिखराव की ओर बढ़ रहा हैः सर्वे

जर्मनी में सामाजिक एकजुटता को लेकर लोगों की चिंता गहराती जा रही है. स्थानीय मीडिया संस्थानों एआरीडी, जेडडीएफ और डॉयचलांड रेडियो की ओर से प्रकाशित एक नई अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर लोग मानते हैं कि समाज बिखराव की ओर बढ़ रहा है. सर्वे में शामिल 76 प्रतिशत लोगों ने इस कथन से सहमति जताई कि देश में सामाजिक एकजुटता खतरे में है.

लोकतंत्र को लेकर तस्वीर थोड़ी अलग है. रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा स्थिति से हर तीन में से केवल एक व्यक्ति संतुष्ट है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर बुनियादी भरोसा कायम है. 82 प्रतिशत जर्मन नागरिकों ने लोकतंत्र का समर्थन किया और कहा कि यह व्यवस्था कायम रहनी चाहिए.

अध्ययन में यह भी पूछा गया कि कौन-सी संस्थाएं समाज में एकजुटता बनाए रखने में योगदान देती हैं. स्पोर्ट्स क्लब, विज्ञान संस्थान और संघीय संवैधानिक न्यायालय शीर्ष पर रहे, जबकि सार्वजनिक प्रसारक चौथे स्थान पर आए. राजनीतिक दल और चर्च को सबसे निचले पायदान पर आंका गया. यह अध्ययन 14 मार्च से 17 अप्रैल के बीच किया गया, जिसमें 14 वर्ष और उससे अधिक आयु के 1,351 लोगों को शामिल किया गया.

अफगानिस्तान में तालिबान की इंटरनेट पर सख्ती बढ़ाई

अफगानिस्तान में तालिबान के अधिकारियों ने बुधवार, 17 सितंबर को इंटरनेट पर अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है. अधिकारियों ने कहा कि कई प्रांतों में फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन काट दिए गए हैं.

तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा के आदेश पर उठाए गए इस कदम से दो दिनों में कई क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट प्रभावी रूप से बंद हो गया है, जिससे हजारों लोग इंटरनेट से वंचित हो गए हैं और स्थानीय लोगों में चिंता पैदा हो गई है.

30 साल से अमेरिका में रहते भारतीय तो इमिग्रेशन विभाग ने पकड़ा

पिछले तीन दशक से अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के ग्रीन कार्ड धारक परमजीत सिंह छह हफ्ते से हिरासत में हैं. उन्हें 30 जुलाई को शिकागो के ओ’हारे एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन एजेंटों ने हिरासत में ले लिया था. न्यूजवीक की रिपोर्ट के अनुसार, फोर्ट वेन, इंडियाना में कारोबार चलाने वाले सिंह भारत यात्रा से लौटे तो जब उन्हें रोक लिया गया.

उनके वकील लुइस एंजेलेस ने न्यूजवीक को बताया कि यह हिरासत सिंह और उनके परिवार के लिए “बेहद भयावह” रही है. सिंह को ब्रेन ट्यूमर और हृदय रोग है. रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें एयरपोर्ट पर पांच दिन तक रोके रखा गया और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद ही आपातकालीन कक्ष में ले जाया गया.

एंजेलेस ने कहा कि सिंह के परिवार को अस्पताल ले जाने की जानकारी केवल तब मिली जब उन्हें मेडिकल बिल मिला.

एंजेलेस ने कहा कि यह कथित मामला एक पुराने “पे फोन का इस्तेमाल बिना भुगतान के करने” से जुड़ा है. उनके मुताबिक, “यह एक मामूली उल्लंघन है जिसके लिए सिंह पहले ही पूरी जवाबदेही ले चुके हैं, अपनी सजा काट चुके हैं और समाज के प्रति अपना कर्ज चुका चुके हैं.”

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अवैध प्रवासियों की बड़े पैमाने पर निर्वासन योजना पर जोर दिया था. खासकर हिंसक आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को निशाना बनाते हुए उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है. जनवरी में उनके दोबारा पदभार संभालने के बाद प्रशासन ने डिपोर्टेशन को तेज किया है. लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस सख्ती में ऐसे लोग भी फंस रहे हैं जिनका अपराध केवल दशकों पुराने हल्के उल्लंघनों तक सीमित है, या जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड ही नहीं है.

ईयू ने किया भारत के लिए विशेष एजेंडे का एलान

यूरोपीय संघ ने भारत के साथ एक नए “रणनीतिक एजेंडा” का एलान किया है, जो इस बात का संकेत है कि वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने की कोशिश में ईयू अब अमेरिका से आगे बढ़कर देख रहा है.

समझौते में सुरक्षा और तकनीक पर सहयोग के प्रस्ताव शामिल हैं. साथ ही इस वर्ष भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता पूरा करने की ईयू की प्रतिबद्धता दोहराई गई. आयोग ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष “ईयू-भारत सुरक्षा और रक्षा साझेदारी” बनाने की संभावना तलाश रहे हैं.

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन ने पहल की घोषणा करते हुए कहा, “अब समय है कि हम साझा हितों और सामान्य मूल्यों पर आधारित साझेदारियों को और गहरा करें. नई ईयू-भारत रणनीति के साथ हम अपने रिश्तों को अगले स्तर पर ले जा रहे हैं.”

हालांकि, चुनौतियां भी सामने आई हैं. ब्रसेल्स में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोस शेफकोविच और विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने इस बात पर निराशा जताई.

शेफकोविच ने कहा कि पिछले हफ्ते नई दिल्ली में भारतीय समकक्षों से मुलाकात के दौरान उन्होंने अधिक प्रगति की उम्मीद की थी. वहीं कालास ने कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद अब भी एक “महत्वपूर्ण मसला” बनी हुई है.

पाकिस्तान-सऊदी अरब के बीच बड़ा रक्षा समझौता, एक पर हमला दोनों पर माना जाएगा

पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार को एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें यह कहा गया कि किसी भी देश पर किया गया हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक दिवसीय दौरे पर सऊदी अरब गए थे जहां उन्होंने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते की घोषणा करते हुए दोनों देशों ने कहा कि वे किसी एक पर हमले को "दोनों के खिलाफ आक्रमण" मानेंगे.

दोनों देशों के बीच यह समझौता ऐसे समय हुआ, जब 9 सितंबर को इस्राएल ने दोहा में हमास के नेताओं को निशाना बनाते हुए हमला किया था. इस हमले के बाद खाड़ी देश अपने दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटर के रूप में अमेरिका की विश्वसनीयता को लेकर चिंतित हैं.

सऊदी प्रेस एजेंसी द्वारा प्रकाशित एक बयान में कहा गया है, "इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के पहलुओं को विकसित करना और किसी भी आक्रमण के विरुद्ध संयुक्त प्रतिरोध को मजबूत करना है."

यह समझौता मई में परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और भारत के बीच चार दिनों तक चले तनावपूर्ण सैन्य संघर्ष के बाद हुआ है, जिसमें मिसाइल, ड्रोन और तोपों की गोलाबारी में 70 सैन्यकर्मी और नागरिक मारे गए थे. भारत ने 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद पाकिस्तान के भीतर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. भारत का आरोप है कि पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है, जबकि पाकिस्तान ने आरोपों से इनकार किया.

क्या बोला भारत

पाकिस्तान-सऊदी अरब के समझौते पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की रिपोर्टें देखी हैं. सरकार को पता था कि यह घटनाक्रम हो सकता है. जो दोनों देशों के बीच एक दीर्घकालिक समझौते को औपचारिक रूप देता है. यह लंबे समय से विचाराधीन था." उन्होंने आगे कहा कि नई दिल्ली सभी रणनीतिक उपायों का आकलन करेगी.

उन्होंने कहा, "हम इस घटनाक्रम के हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे. सरकार भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है."

ट्रंप ने भारत-पाक समेत 23 देशों को ड्रग तस्कर बताया

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत, पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान को उन 23 देशों में शामिल किया है, जिन्हें "प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या प्रमुख अवैध ड्रग उत्पादक देश" के रूप में नामित किया गया है. ट्रंप ने सोमवार को प्रेसिंडेंशियल डिटरमिनेशन के तहत एक लिस्ट कांग्रेस को सौंपी है जिसमें 23 देशों का नाम शामिल है. ट्रंप ने कहा कि ये देश अवैध ड्रग्स और उनके कच्चे माल का उत्पादन और तस्करी करके अमेरिका और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.

कौन-कौन से देश लिस्ट में शामिल

जिन देशों को इस लिस्ट में शामिल किया गया वे हैं- अफगानिस्तान, बहामास, बेलीज, बोलीविया, बर्मा, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, भारत, जमैका, लाओस, मैक्सिको, निकारागुआ, पाकिस्तान, पनामा, पेरू और वेनेजुएला.

अमेरिका ने उन पांच देशों के भी नाम लिए जिनपर मादक पदार्थ विरोधी दायित्वों को सही तरीके से पूरा नहीं करने का आरोप है. इन देशों में अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा, कोलंबिया और वेनेजुएला शामिल हैं.

ट्रंप ने चीन पर कड़े शब्दों में निशाना साधते हुए उसे फेंटेनाइल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों का "दुनिया का सबसे बड़ा स्रोत" बताया. उन्होंने कहा कि इन रसायनों के निर्यात पर अंकुश लगाने में चीन की विफलता ने मेक्सिको और अमेरिका के रास्ते फेंटेनाइल की तस्करी में तेजी ला दी है.

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