काबुल, अफगानिस्तान: भारत की प्रसिद्ध संस्था भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (BMVSS) ने काबुल में विकलांग लोगों को कुत्रिम पैर लगाएं. बताया जा रहा है की करीब 100 अफगान नागरिकों को कुत्रिम पैर लगाएं गए है. इन पैरों के कारण अब ये लोग चल भी सकते है,दौड़ भी सकते है और अपना रोजमर्रा का काम भी कर सकते है.भारत ने अफगानिस्तान में अपनी मानवीय प्रतिबद्धता को निभाते हुए हाल ही में काबुल में पांच दिवसीय 'जयपुर फुट' शिविर का आयोजन किया. इस शिविर का उद्देश्य युद्ध व हादसों के शिकार अफगान नागरिकों को फिर से चलने में सहायता प्रदान करना था.
इस दौरान करीब 100 लोगों को कृत्रिम अंग और अन्य चलने-फिरने के सहायक उपकरण लगाए गए. इसका वीडियो सोशल मीडिया X पर @sidhant नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:VIDEO: पाकिस्तान के स्वात नदी में दो परिवारों के 18 लोग बहे, 17 की हुई मौत, प्रशासन से नहीं मिली कोई मदद, घटना का वीडियो आया सामने
कुत्रिम पैर लगाकर खुश हुआ अफगानी नागरिक
Indian doctors fit artificial limbs for 100 disabled Afghan citizens in Kabul. pic.twitter.com/whSkSqlSfK
— Sidhant Sibal (@sidhant) June 30, 2025
भारत-अफगान साझेदारी का मानवीय स्वरूप
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने 29 जून को X पर जानकारी दी कि यह शिविर एक भारतीय चैरिटेबल संस्था द्वारा भारतीय दूतावास के सहयोग से आयोजित किया गया.उन्होंने बताया कि कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, और अन्य सहायक उपकरणों के ज़रिए शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को पुनर्वास में मदद दी गई.
'जयपुर फुट' की पहचान और उद्देश्य
इस पहल का संचालन भारत की प्रसिद्ध संस्था भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (BMVSS), जयपुर ने किया, जो विश्वभर में अपने कम लागत वाले जयपुर फुट के लिए जानी जाती है. यह फुट न केवल पैरों से वंचित लोगों को चलने योग्य बनाता है, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ जीने का अवसर भी देता है.
अफगानिस्तान में भारत की निरंतर मदद
भारत लगातार खाद्य सहायता, दवाइयां, छात्रवृत्तियां, और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के ज़रिए अफगानिस्तान की जनता की मदद करता आया है. जयपुर फुट शिविर भी इसी उद्देश्य की एक कड़ी है, जो अफगानिस्तान में चल रहे मानवीय संकट के बीच एक लोग-केंद्रित विकास सहयोग मॉडल को दर्शाता है.
दुनिया भर में BMVSS की छाप
BMVSS अब तक 44 देशों में 111 शिविरों का आयोजन कर चुका है.'India for Humanity' पहल के तहत भारत सरकार ने 22 देशों में 28 शिविरों का समर्थन किया है. जयपुर फुट, SACH फुट से अलग, एक विशेष पॉलीमर-आधारित सॉकेट और भारत में डिजाइन किए गए फुट से जुड़ा होता है. ऊपरी पैर कटने वाले रोगियों के लिए 'जयपुर-नी' नामक घुटना जो Stanford University और BMVSS ने मिलकर विकसित किया है, विशेष रूप से उपयोग में लाया जाता है.यह संस्था 44 वर्षों में 22 लाख से अधिक दिव्यांगों को मुफ्त सेवा दे चुकी है. इसकी खासियत यह है कि मरीज बिना किसी अपॉइंटमेंट के शिविर में आ सकते हैं. लेजर लाइन अलाइनमेंट, गेट एनालिसिस लैब, और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिटमेंट व चेकआउट प्रक्रिया इसके सेवा मॉडल का हिस्सा हैं.संस्था के संस्थापक डी.आर. मेहता का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में भी यह सेवा अधिक से अधिक ज़रूरतमंदों तक पहुंचे और इसका दायरा लगातार विस्तृत हो.













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