ट्रंप की धमकियों और देशव्यापी प्रदर्शनों के बीच ईरान का दावा, पूरी तरह काबू में आए हालात
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 500 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है. सरकार का आरोप है कि प्रदर्शन हिंसक हुए, ताकि ट्रंप को दखल देने का बहाना मिल जाए. तेहरान का यह भी दावा है कि अब हालात काबू में हैं.ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने आरोप लगाया है कि देशभर में हुए प्रदर्शन "हिंसक और खूनी" हो गए, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को हस्तक्षेप का बहाना मिल जाए. अरागची ने इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं दिया.

500 से ज्यादा मौतें, 10 हजार से अधिक लोग हिरासत में

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, बीते दो हफ्तों में प्रदर्शनों के दौरान कम-से-कम 544 लोग मारे जा चुके हैं. अमेरिका स्थित 'ह्युमन राइट्स ऐक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी' के मुताबिक, मृतकों में 496 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बल के लोग हैं. अब तक 10,600 लोगों को हिरासत में लिया गया है. संगठन के अनुसार, देश के सभी 31 प्रांतों में अब तक कुल मिलाकर 500 से ज्यादा प्रोटेस्ट हुए हैं.

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हालिया सालों में ईरान में हुए प्रदर्शनों के दौरान इस संगठन द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़े सटीक साबित होते रहे हैं. सूचनाओं की पुष्टि के लिए यह ईरान में समर्थकों के नेटवर्क पर निर्भर है. देश में इंटरनेट और फोन लाइनें बंद हैं. ऐसे में ईरान के बाहर से प्रदर्शनों का मौजूदा पैमाना बता पाना, या स्वतंत्र रूप से मृतकों की संख्या की पुष्टि कर पाना ज्यादा मुश्किल हो गया है. ना ही सरकार ने मृतकों की कोई आधिकारिक संख्या बताई है.

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मृतकों की बढ़ती संख्या के बावजूद विदेश मंत्री अरागची का कहना है कि हालात अब पूरी तरह से नियंत्रण में हैं. उन्होंने राजधानी तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बात करते हुए यह दावा किया.

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एक ओर उन्होंने स्थितियों के काबू में होने की बात कही, वहीं सरकार द्वारा समर्थकों से सड़कों पर उतरने की अपील की गई है. कई विश्लेषकों के अनुसार, सुप्रीम लीडर की सत्ता को मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर सरकार , अपने पक्ष में शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से खुद की वैधता सिद्ध करने की कोशिश कर रही है.

ट्रंप का दावा, बात करना चाहता है तेहरान

ईरान में जारी इस घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान बातचीत करना चाहता है. प्रदर्शनकारियों के दमन को वजह बताकर ट्रंप ने इस्लामिक रिपब्लिक पर वार करने की चेतावनी दी थी.

खबरों के मुताबिक, ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम, ईरान पर संभावित कार्रवाई के विकल्पों पर विमर्श कर रही है. समाचार एजेंसी एपी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इन विकल्पों में साइबर अटैक और सीधा हमला शामिल हैं.

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11 दिसंबर को 'एयर फोर्स वन' पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने भी कहा, "सेना इसे देख रही है. हम कुछ बहुत सख्त विकल्पों पर विचार कर रहे हैं." ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाबत पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "अगर वो ऐसा करते हैं, तो हम ऐसे स्तर पर उनके ऊपर वार करेंगे जैसा वार उनपर पहले कभी नहीं हुआ होगा."

इसी क्रम में ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन, ईरानी सरकार के साथ एक बैठक तय करने में लगा है. वह बोले, "मुझे लगता है वो अमेरिका द्वारा चोट पहुंचाए जाने से थक गए हैं. ईरान बातचीत करना चाहता है. मीटिंग तय की जा रही है, लेकिन बैठक से पहले जो हो रहा है उसकी वजह से हमें कदम उठाना पड़ सकता है. लेकिन, मीटिंग तय की जा रही है."

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ट्रंप के इस दावे के बाबत तेहरान ने सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. अगर तेहरान बात करता भी है, तो वह अमेरिका से क्या वादा करेगा, या कौन से कदम उठाने की पेशकश करेगा, यह साफ नहीं है.

तेहरान और वॉशिंगटन के बीच प्रत्यक्ष तौर पर सबसे बड़ी फांस ईरान का परमाणु कार्यक्रम है. ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और बैलिस्टिक मिसाइलों के जखीरे पर ट्रंप की मांगें सख्त हैं. जबकि, ईरान इन्हें अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताता है.

तेहरान में खौफ का माहौल, अभिभावकों के नाम संदेश

एपी ने एक चश्मदीद के हवाले से बताया कि रात की नमाज तक राजधानी की सड़कें वीरान हो जा रही हैं. लोगों में डर है कि कहीं वे सुरक्षाबलों की कार्रवाई की चपेट में ना आएं.

पुलिस विभाग ने जनता को एक संदेश भेजकर चेताया, "बीती रात कुछ जुटानों में आतंकवादी समूहों और हथियारबंद व्यक्तियों की उपस्थिति और मारने की उनकी योजनाओं को देखते हुए, और किसी भी तरह के तुष्टिकरण को बर्दाश्त ना करने और दंगाईयों के साथ मजबूती से निपटने के दृढ़ निर्णय के मद्देनजर परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने युवाओं और किशोरों का ध्यान रखें."

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पैरामिलिट्री रेवॉल्यूशनरी गार्ड की खुफिया शाखा ने भी कथित तौर पर एक संदेश भेजा, जिसमें लोगों को साफ-साफ चेताया गया कि वे प्रदर्शनों में हिस्सा ना लें. एपी के अनुसार, इस मैसेज में लिखा था, "प्रिय अभिभावक.. सड़कों पर उपस्थित होने से बचें और हिंसा में शामिल जुटानों में शामिल ना हों. अपने बच्चों को जानकारी दें कि आतंकवादी भाड़े के सैनिकों के साथ सहयोग के, जो कि देश के साथ गद्दारी का एक उदाहरण है, क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं."