टेक

सेलफोन रेडीयस से इंसानों को कोई नुकसान नही

ह्रदय से जुड़ी कैंसरयुक्त रसौली विकसित हो जाती है. यूएस नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम (एनटीपी) को 30 मिलियन अमरीकी डॉलर की लागत से इस अध्ययन को पूरा करने में 10 साल का समय लगा है.

सेलफोन रेडीयस से इंसानों को कोई नुकसान नही
प्रतीकात्मक ( Photo Credit-Pixabay )

मैसाच्युटेस:  हाल के अमेरिकी अध्ययन में दावा किया गया है कि सेलफोनों द्वारा उत्सर्जित रेडियो-आवृत्ति विकिरण (आरएफआर) भले ही चूहे में कैंसर का कारक हो लेकिन यह तथ्य मनुष्यों पर लागू नहीं होता. अध्ययन से पता चला है कि इस बात के "स्पष्ट साक्ष्य" है कि जब नर चूहे इस तरह के विकिरण के उच्च स्तर के संपर्क में आते हैं, जैसे सेल फोन में होता है, तो उनमें ह्रदय से जुड़ी कैंसरयुक्त रसौली विकसित हो जाती है. यूएस नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम (एनटीपी) को 30 मिलियन अमरीकी डॉलर की लागत से इस अध्ययन को पूरा करने में 10 साल का समय लगा है.

इसमें विकिरण के संपर्क में आये नर चूहों के मस्तिष्क और एड्रेनल ग्रंथि में रसौली के "कुछ सुबूत" भी सामने आये हैं.  रिपोर्ट के बाद, कुछ गैर सरकारी संगठनों और वैज्ञानिकों का प्रस्ताव है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की इंटर एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) को आरएफआर के वर्गीकरण को मौजूदा समूह 2बी (संभावित मानव कैंसरजन) से समूह 1 (मानव कैंसरजन) में उन्नयन करना होगा.

यह भी पढ़ें: BMW की MINI Countryman भारत में हुई लॉन्च, जानें इसकी कीमत और फीचर्स

लेकिन विशेषज्ञ एजेंसियों ने जोर देकर कहा है कि यह खोज मनुष्यों पर लागू नहीं होती है.

गैर-आयनीकरण विकिरण संरक्षण (आईसीएनआईआरपी) पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग ने स्पष्ट रूप से इस अध्ययन की जानकारी देते हुए एक नोट प्रकाशित किया है कि यह अध्ययन वर्तमान में आरएफआर के लिए मौजूदा सुरक्षा दिशानिर्देशों को बदलने के लिए कोई कार्रवाई योग्य आगत प्रदान नहीं करता है. आईसीएनआईआरपी की अनुशंसाएं डब्ल्यूएचओ जैसी संस्थाएं और कई देश स्वीकार करते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 04, 2018 02:15 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).