यूं तो काशी, वाराणसी, बनारस तीनों में किसी भी नाम से पुकारें इसका मूलरूप नहीं बदलता, क्योंकि काशी जीवन जीने की कला का नाम है। त्रिनेत्रधारी भगवान भोले शंकर की नगरी काशी में गंगा के साथ-साथ विकास की धारा भी बह रही है। देखें जनता के शो- 'क्या बोले यूपी' मेंhttps://t.co/jf8C82iuLK— प्रसार भारती न्यूज सर्विसेज (@PBNS_Hindi) November 26, 2021
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