Fact Check: महिला की बेरहमी से पिटाई का VIDEO भ्रामक एंगल से किया जा रहा शेयर, फैक्ट चेक में सामने आया चौंकाने वाला सच
Photo- @AnujmSamrat & @SaimaBegum96153/X

Udhampur Azam Ali Dowry Cas Fact Check: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति अपनी पत्नी की बेरहमी से पिटाई करता नजर आ रहा है. वीडियो इतना भयावह है कि जिसने भी इसे देखा, गुस्से से भर गया. दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहे दंपति हिंदू धर्म से संबंधित है. इस वीडियो को शेयर करते हुए एक्स यूजर @AsrAmjad ने लिखा, ''हिंदू धर्म में महिलाओं को देवी कहा जाता है और ये वही लोग हैं जो उन देवियों पर अत्याचार करते हैं! ये वही लोग हैं जो कहते हैं कि हिजाब में लड़कियां अपनी आजादी खो देती हैं. एक अन्य 'एक्स' यूजर @SaimaBegum96153 ने भी इस वीडियो को शेयर किया और महिलाओं के सम्मान को लेकर आवाज बुलंद की.

लेकिन हमारी पड़ताल में पता चला कि यह दावा झूठा है. दरअसल, आरोपी का नाम आजम अली है और वह एक सेवारत सैनिक है. यानी वीडियो के साथ शेयर की गई सांप्रदायिक पहचान पूरी तरह से गलत थी.

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आरोपी की पहचान पर फैलाई गई अफवाह (चेतावनी: विचलित करने वाले दृश्य, दर्शक अपने विवेकानुसार देखें)

जांच पड़ताल में क्या सामने आया?

वायरल वीडियो की पड़ताल के लिए हमने वीडियो के स्क्रीनशॉट फुटेज को गुगल इमेज में सर्च किया. जहां हमें republicworld.com और news18.com की रिपोर्ट मिली. इसमें बताया गया था कि यह घटना 7 अगस्त 2025 को उधमपुर के मल्हार इलाके में हुई. रिपोर्ट्स और पुलिस बयान के मुताबिक, आजम अली ने अपनी पत्नी रवीना बेगम को सिर्फ इसलिए पीटा क्योंकि वह 10 लाख रुपये नकद और एक कार की उसकी मांग पूरी नहीं कर पाई.

वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि वह महिला को थप्पड़ मार रहा है, घूंसे बरसा रहा है और हाथ पकड़कर घसीट रहा है. इस दौरान वह गालियां और धमकियां भी देता है.

गलत जानकारी क्यों फैलाई जा रही?

पीड़िता को गंभीर हालत में सरकारी मेडिकल कॉलेज, उधमपुर में भर्ती कराया गया. उसके परिवार ने रहमबल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दहेज उत्पीड़न और लगातार मारपीट के आरोप लगाए गए. पुलिस ने तुरंत आईपीसी की धारा 498ए (पति द्वारा क्रूरता) और अन्य धाराओं में केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल वह पुलिस हिरासत में है.

जांच में सामने आया कि कई यूजर्स ने वीडियो को बिना जांचे-परखे शेयर किया और सांप्रदायिक एंगल जोड़ दिया. ऐसा करने से न केवल गलत सूचना फैली, बल्कि दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश भी हुई.

फैक्ट चेक में क्या निकला निष्कर्ष?

फैक्ट चेक के बाद यह साफ है कि यह मामला सिर्फ दहेज हिंसा की गंभीर समस्या को नहीं, बल्कि गलत सूचना के खतरों को भी उजागर करता है. भारत में हर साल हजारों महिलाएं दहेज के लिए प्रताड़ना झेलती हैं, जबकि कानून इसे अपराध मानता है.

वहीं, सोशल मीडिया पर अफवाहें और फेक न्यूज समाज में तनाव पैदा कर सकती हैं, इसलिए जरूरी है कि किसी भी वायरल कंटेंट पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जांची जाए.