Fatima Jatoi Viral Video: सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म्स जैसे टिकटॉक, इंस्टाग्राम और एक्स (X) पर इन दिनों 'फातिमा जतोई' (Fatima Jatoi) के नाम से एक कथित वीडियो को लेकर सर्च ट्रेंड काफी बढ़ गया है. इंटरनेट पर हजारों लोग ‘6 मिनट 39 सेकंड’ (6 minutes 39 seconds) की मूल वीडियो क्लिप खोजने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, साइबर सुरक्षा विश्लेषकों और फैक्ट-चेकर्स ने चेतावनी दी है कि यह ट्रेंड पूरी तरह से एक 'एंगेजमेंट ट्रैप' है, जिसका उद्देश्य यूजर्स का डेटा चुराना और उनके डिवाइस में मालवेयर (वायरस) फैलाना है.
हाल ही में वायरल हुए 'मैरी एस्टार' और 'उमैर' के फर्जी वीडियो की तरह ही, यह कैंपेन भी लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाकर उन्हें खतरनाक लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाता है. यह भी पढ़ें: 7 Minutes 11 Seconds Viral MMS: सोशल मीडिया पर वायरल 'मैरी और उमैर' के वीडियो का क्या है सच? जानें गिरफ्तारी के दावों की हकीकत
क्या है '6 मिनट 39 सेकंड' के वीडियो का सच?
जनवरी की शुरुआत से ही टिकटॉक और एक्स पर कई गुमनाम अकाउंट्स ने फातिमा जतोई के निजी वीडियो लीक होने के दावे किए. इन पोस्ट्स में अक्सर वीडियो की सटीक अवधि (6 मिनट 39 सेकंड) बताई जाती है और यूजर्स को बायो या पिन किए गए लिंक पर जाने के लिए कहा जाता है.
पड़ताल से पता चलता है कि यह वीडियो या तो अस्तित्व में ही नहीं है या फिर डीपफेक (Deepfake) तकनीक और एआई (AI) का उपयोग करके बनाया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह किसी की छवि खराब करने और वेबसाइटों पर ट्रैफिक बढ़ाने के लिए बनाया गया एक प्रायोजित 'होक्स' (Hoax) है.
फातिमा जटोई का वीडियो बयान जिसमें उन्होंने 'पवित्र कुरान' पकड़ा हुआ है...
Fatima jatoi after viral video.pic.twitter.com/gw59OoQ71o
— Alyan khan (@alyankhan57230) January 9, 2026
फातिमा जतोई ने तोड़ी चुप्पी
सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद के बीच, फातिमा जतोई ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. रिपोर्टों के अनुसार, टिकटोकर ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन प्रसारित किया जा रहा कंटेंट असली नहीं है और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने इसे अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की एक साजिश बताया है.
फातिमा जटोई के वीडियो वाले इंस्टाग्राम रील्स वायरल हो रहे हैं.
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साइबर हमले का नया तरीका: '6:39' ट्रैप
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सर्च टर्म में समय (6m 39s) की स्पष्टता यह दर्शाती है कि यह कोई आकस्मिक लीक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर हमला है. ऐसे लिंक पर क्लिक करने से आपको निम्नलिखित खतरों का सामना करना पड़ सकता है:
- फर्जी प्लेयर पेज: ये वेबसाइटें वीडियो दिखाने का झांसा देकर आपसे ऐप्स डाउनलोड करवाती हैं या विज्ञापन दिखाती हैं.
- फिशिंग साइट्स: ये आपके फेसबुक या इंस्टाग्राम लॉगिन पेज की नकल करती हैं ताकि आपका पासवर्ड चुराया जा सके.
- मालवेयर डाउनलोड: ‘वीडियो कोडेक’ या ‘प्लेयर अपडेट’ के नाम पर आपके फोन में हानिकारक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो सकते हैं.
- ऐड फार्म्स: ऐसी साइटें जो केवल क्लिक के जरिए पैसा कमाने के लिए बनाई गई हैं. यह भी पढ़ें: Fact Check: क्या 7 मिनट 11 सेकेंड के वायरल वीडियो वाले कपल 'Marry' और 'Umair' को पाकिस्तान में किया गया गिरफ्तार? जानें सच
एआई-जनरेटेड वीडियो को कैसे पहचानें?
डीपफेक वीडियो की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने कुछ प्रमुख संकेत बताए हैं:
- असामान्य पलक झपकना: एआई द्वारा बनाए गए किरदारों की पलकें या तो बहुत अजीब तरीके से झपकती हैं या बिल्कुल नहीं.
- लाइटिंग और शैडो: चेहरे पर पड़ने वाली रोशनी अक्सर बैकग्राउंड की लाइटिंग से मेल नहीं खाती.
- डिजिटल मास्क: तेज हलचल होने पर चेहरे की रेखाएं (जबड़ा या बाल) धुंधली दिखने लगती हैं.
फातिमा जतोई से जुड़ा यह कथित वीडियो अपुष्ट है और इसके असली होने का कोई प्रमाण नहीं है. यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे ‘फुल वीडियो’ के झांसे में आकर किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि यह आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम हो सकता है.













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