Christopher Columbus Was A Jews: क्रिस्टोफर कोलंबस के डीएनए एनालिसिस से सुलझा 500 साल पुराना रहस्य, प्रसिद्ध नाविक क्रिस्चियन नहीं बल्कि स्पेन के यहूदी थे
अडवांस डीएनए एनालिसिस का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने अवशेषों का मैच कोलंबस के बेटे हर्नांडो ((Hernando)) और उसके भाई, डिएगो (Diego) के अवशेषों से किया, जिन्हें गिरजाघर (Cathedral) में दफनाया गया है...
अडवांस डीएनए एनालिसिस का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने अवशेषों का मैच कोलंबस के बेटे हर्नांडो (Hernando)) और उसके भाई, डिएगो (Diego) के अवशेषों से किया, जिन्हें गिरजाघर (Cathedral) में दफनाया गया है. इस सफलता ने लंबे समय से चली आ रही शंकाओं को दूर कर दिया है कि क्या सेविले में मौजूद हड्डियाँ वास्तव में कोलंबस की थीं, जिनके शरीर को 1506 में उनकी मृत्यु के बाद कई बार स्थानांतरित किया गया था. कोलंबस की मरणोपरांत यात्रा तब शुरू हुई जब उनकी मृत्यु स्पेन के वलाडोलिड (Valladolid) में हुई, लेकिन उनके अवशेषों को सबसे पहले उनकी इच्छा के अनुसार 1542 में हिस्पानियोला द्वीप (Hispaniola), आधुनिक हैती (Haiti) और डोमिनिकन गणराज्य में स्थानांतरित किया गया था. वहां से, उन्हें 1795 में क्यूबा (Cuba) ले जाया गया, जब स्पेन ने हिस्पानियोला पर नियंत्रण खो दिया, और बाद में स्पेनिश-अमेरिकी युद्ध में स्पेन की हार के बाद 1898 में सेविले (Seville) में वापस आ गए. इस निरंतर स्थानांतरण के साथ-साथ यह दावा भी किया गया कि डोमिनिकन गणराज्य में पाए गए अवशेषों का एक और सेट भी कोलंबस का हो सकता है, जिसने सेविले में हड्डियों की प्रामाणिकता के बारे में संदेह को बढ़ावा दिया. यह भी पढ़ें: North Korea: उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में बढ़ा तनाव, सड़क तबाह करने का South Korea ने लगाया आरोप
शोध के पीछे की टीम का नेतृत्व ग्रेनेडा विश्वविद्यालय के फोरेंसिक वैज्ञानिक जोस एंटोनियो लोरेंटे (José Antonio Lorente) ने किया, जिन्होंने इस मामले पर काम करते हुए 20 से अधिक वर्ष बिताए हैं. लोरेंटे ने "पूर्ण विश्वसनीयता" के साथ निष्कर्षों की घोषणा की, यह बताते हुए कि डीएनए प्रौद्योगिकी में प्रगति ने निर्णायक परिणामों की अनुमति दी है. लोरेंटे की टीम ने स्पेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको और इटली की प्रयोगशालाओं के साथ काम किया, जिनमें से सभी ने क्लीनिकों के बीच संचार के बिना डीएनए मिलान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की.
हालांकि अवशेषों की पहचान की पुष्टि हो गई है, लेकिन कोलंबस के ओरिजिन का सवाल अभी भी खुला है. एक नए आनुवंशिक अध्ययन से पता चला है कि प्रसिद्ध खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस इटालियन नहीं थे, जैसा कि पारंपरिक रूप से माना जाता है, बल्कि संभवतः वे स्पेन के सेफर्डिक यहूदी थे, जिन्होंने उत्पीड़न से बचने के लिए अपनी असली विरासत को छुपाया था.
स्पेन के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इस शोध का उद्देश्य कोलंबस के बैग्राउंड के बारे में लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता को दूर करना है. इतिहासकारों ने कई वर्षों से 15वीं शताब्दी के नाविक के जन्मस्थान पर बहस की है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह इटली के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित गणराज्य जेनोआ से आया था. हालांकि, बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेविले कैथेड्रल में रखे गए कोलंबस के अवशेषों के डीएनए विश्लेषण से इस कथन को चुनौती देने वाले ठोस सबूत मिले हैं.
फोरेंसिक विशेषज्ञ और जांचकर्ता ने कोलंबस डीएनए: द ट्रू ओरिजिन नामक एक डॉक्यूमेंट्री में कहा, "हमारे पास क्रिस्टोफर कोलंबस का डीएनए है, जो बहुत आंशिक है लेकिन पर्याप्त है. हमारे पास उनके बेटे हर्नांडो कोलोन का डीएनए है और हर्नांडो के वाई [पुरुष] गुणसूत्र और माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए [माँ से] दोनों में यहूदी मूल के साथ संगत लक्षण हैं." यह डॉक्यूमेंट्री हाल ही में स्पेन में प्रसारित हुई थी.
शोध की शुरुआत 2003 में हुई जब ग्रेनेडा विश्वविद्यालय के फोरेंसिक मेडिसिन के प्रोफेसर जोस एंटोनियो लोरेंटे ने इतिहासकार मार्शियल कास्त्रो के साथ मिलकर सेविले कैथेड्रल से कोलंबस के अवशेष निकाले. ऐतिहासिक संदर्भों द्वारा समर्थित उनके निष्कर्षों से पता चलता है कि कोलंबस ने अपनी यहूदी जड़ों को छिपाया होगा या उस समय स्पेन में प्रचलित धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए कैथोलिक धर्म अपना लिया होगा.
हालांकि शोधकर्ताओं ने अभी तक कोलंबस के सटीक जन्मस्थान का पता नहीं लगाया है, लेकिन उनका मानना है कि यह संभवतः पश्चिमी यूरोप में कहीं है, जिसमें वेलेंसिया, स्पेन एक मजबूत संभावना है, जैसा कि न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 15, 2024 03:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

