World Glaucoma Day 2024: आज है विश्व ग्लूकोमा दिवस! जानें  आंखों के इस गंभीर रोग पर क्या कहती हैं मशहूर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल सोनी?
World Glaucoma Day 2024(img :File Photo)

प्रत्येक वर्ष 12 मार्च को विश्व ग्लूकोमा दिवस’ मनाया जाता है, इसका मुख्य उद्देश्य ग्लूकोमा के बारे में आम लोगों को जागरूक करना और समय से पूर्व इसका इलाज करना है. ग्लूकोमा आंखों की मूल एवं गंभीर समस्याओं में एक है, जिसका सही समय पर इलाज न होने से दृष्टि हानि एवं अंधेपन का जोखिम भी हो सकता है. इस अवसर पर ग्लूकोमा की शीघ्र पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों, स्क्रीनिंग और अभियानों द्वारा चिह्नित किया जाता है. गुड़गांव स्थित नेत्र रोग विशेषज्ञा डॉ. पारुल सोनी यहां ग्लूकोमा के संदर्भ में कुछ आवश्यक जानकारियां दे रही हैं.

क्या है ग्लूकोमा?

डॉ पारुल के अनुसार ग्लूकोमा ऐसी बीमारी है, जो आंख की दृष्टि को धीरे-धीरे कमजोर करती है. यह बीमारी आंख के अंदरूनी हिस्से में दबाव के कारण आंख के रक्त संवहन (Blood Vessels of the Eye) में बढ़ते दबाव से होती है. अधिक चाप से रक्त संवहनी खराब हो जाती है, जिससे आंखों की पिंडली को नुकसान पहुंचता है, जो धीरे-धीरे नजर को कमजोर करता है. इस रोग के शुरुआती लक्षण पता नहीं चलते. अगर इसका समय रहते, इसका इलाज नहीं होता, तो दृष्टि पूरी तरह से नष्ट हो सकती है. इसलिए 35-40 साल के बाद हर किसी को ग्लूकोमा की जांच कराने के साथ ही स्वस्थ जीवन शैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम आदि करते रहना चाहिए. यह भी पढ़ें : Ramzan Mubarak 2024 Wishes: माह-ए-रमजान की इन हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings, Photo SMS के जरिए दें मुबारकबाद

विश्व ग्लूकोमा दिवस का इतिहास:

विश्व ग्लूकोमा दिवस की शुरुआत साल 2008 में हुई थी, जब विश्व ग्लूकोमा एसोसिएशन (WGA) और विश्व ग्लूकोमा रोग संघ (WGPA) ने इस आयोजन की स्थापना के लिए सहयोग किया था. इसका मुख्य उद्देश्य ग्लूकोमा के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना, इस समस्या का शीघ्र पता लगाने को बढ़ावा देना तथा दृष्टि हानि को रोकने के लिए लोगों को नियमित आंखों की जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करना होता है. इसके बाद से हर वर्ष 12 मार्च को विश्व ग्लूकोमा दिवस मनाया जाता है. इस अवसर पर दुनिया भर के विभिन्न संगठन, प्रोफेशनल आई केयर और मुफ्त नेत्र जांच शिविर, शैक्षिक सेमिनार, जन जागरूकता अभियान और सूचना सामग्री के वितरण जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं.

ग्लूकोमा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य:

ग्लूकोमा के प्रकारः ग्लूकोमा कई प्रकार के होते हैं, जिनमें प्राइमरी ओपन-एंगल ग्लूकोमा (POAG), एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा (ACG), सामान्य-तनाव ग्लूकोमा (NTG), और सेकेंडरी ग्लूकोमा प्रमुख है.

जोखिम तत्व: ग्लूकोमा के जोखिमपूर्ण वजहों में प्रमुख है, हाई इंट्राऑकुलर दबाव, ग्लूकोमा का पारिवारिक इतिहास, बढ़ती उम्र, मधुमेह इत्यादि

लक्षण: अक्सर शुरुआत में बिना किसी लक्षण के ग्लूकोमा बढ़ता है, इसलिए इसे ‘दृष्टि का मूक चोर’ (The silent thief of sight) भी कहा जाता है. हालाँकि, जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज को परिधीय दृष्टि हानि, सुरंग दृष्टि, धुंधली दृष्टि, आंखों में दर्द, मतली और उल्टी का अनुभव हो सकता है.

निदान: ग्लूकोमा का निदान एक व्यापक नेत्र परीक्षण से किया जाता है, जिसमें इंट्राऑकुलर दबाव को मापना, ऑप्टिक तंत्रिका का आकलन करना, कॉर्निया मोटाई को मापना और दृश्य क्षेत्र परीक्षण करना होता है.

रेगुलर केयर: ग्लूकोमा एक दीर्घकालिक स्थिति है, जिसकी ताउम्र नियमित जांच और प्रबंधन की आवश्यकता होती है.

रोगी शिक्षा और सहायता: ग्लूकोमा के जोखिम भर कारणों और नियमित नेत्र जांच के महत्व के बारे में जन-जागरण आवश्यक है.