सीरिया, इराक और लेबनान सहित खाड़ी देशों में चांद नजर आ गया है. इन जगहों पर ईद-ए-मिलाद 8 नवंबर की शाम से 9 नवंबर के सूर्यास्त तक मनाया जाएगा. इस बीच, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश समेत भारतीय उपमहाद्वीप में मंगलवार को चांद का दीदार होने की संभावना है.

यूनाइटेड किंगडम और यूरोप के अन्य हिस्सों में आज चांद के दीदार की उम्मीद है. अगर यहां चांद दिख जाता है तो ईद-ए-मिलाद 9 नवंबर को मनाया जाएगा.

इंडोनेशिया और मलेशिया में चांद दिखने की खबर है. इन हिस्सों में ईद-ए-मिलाद 8 नवंबर की शाम से 9 नवंबर के सूर्यास्त तक मनाया जाएगा.

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में चांद के दीदार की कोशिशे चल रही है. 

12 रबी उल अव्वल को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाई जाती है. इसी महीने की 12 तारीख को इस्लाम के आखिरी संदेशवाहक पैगंबर मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था.

Rabi-ul-Awwal 2019: दुनियाभर के मुसलमानों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है. बुधवार या गुरुवार (चांद के दीदार के बाद) से पवित्र रबी उल अव्वल महीने की शुरुआत होगी. इस इस्लामी महीने का मुस्लिम समुदाय सालभर इंतजार करते है. इस महीने की 12 तारीख को इस्लाम के आखिरी संदेशवाहक पैगंबर मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था. पैगंबर मुहम्मद साहब का जन्म सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में हुआ था. उन्होंने इस्लाम धर्म का प्रचार और प्रसार किया. 12 रबी उल अव्वल को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाई जाती है.

इस्लाम धर्म की मान्यता के अनुसार पैगंबर मुहम्मद साहब को अल्लाह ने जमीन पर रहमत और शांति के लिए भेजा था. ऐसा माना जाता की पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब को उस वक्त इस दुनिया में भेजा गया था जब बुराई आम बात हो गई थी. उन्होंने हमेशा शांति व सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने का पैगाम दिया.

रबी उल अव्वल महिना मुसलमानों के लिए बेहद पाक महिना माना जाता है. इस महीने में पैगंबर मुहम्मद साहब की सीरत से लोगों को रु-ब-रु कराया जाता है. महीने भर इबादत और अच्छे काम किये जाते हैं. 12 रबी उल अव्वल के दिन पैगंबर मोहम्मद हजरत साहब के ज़िन्दगी से जुड़े कई अहम् पहलुओं से लोगों को अवगत कराया जाता हैं. जिन लोगों के पास पैसे होते हैं वो इस दिन मक्का-मदीना जाते हैं.

बता दें कि इस्लाम धर्म में पैगंबर मुहम्मद साहब को सबसे ज्यादा माना जाता है. ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के दिन जुलुस निकाल और नामाज पढ़कर इस ईद को गुजार ते हैं. 12 रबी उल अव्वल या ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के दिन ही  पैगंबर मुहम्मद साहब इस दुनिया से रुकसत भी हुए थे.