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फैटी लिवर है दिल का दुश्मन, मरीजों में बढ़ रहा हार्ट फेलियर का खतरा; रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि फैटी लिवर को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, जबकि यह दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

फैटी लिवर है दिल का दुश्मन, मरीजों में बढ़ रहा हार्ट फेलियर का खतरा; रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा
Representational Image | Pixabay

आज दुनिया की लगभग 30% आबादी फैटी लिवर डिजीज से जूझ रही है. इसमें सबसे आम है नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), जिसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-असोसिएटेड स्टीएटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है. इसका मतलब है कि बिना शराब पिए भी लिवर में चर्बी जम जाती है, जो मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जुड़ी होती है. लंबे समय तक यह माना जाता था कि फैटी लिवर सिर्फ लिवर को नुकसान पहुंचाता है. लेकिन हाल की रिसर्च बताती है कि फैटी लिवर वाले मरीजों में दिल की बीमारी और हार्ट फेलियर का खतरा ज्यादा होता है.

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सिर्फ लिवर नहीं, दिल पर भी पड़ता है असर

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि फैटी लिवर को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, जबकि यह दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

चौंकाने वाली रिसर्च

ड्यूक यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में 570 मरीजों को 11 साल तक ट्रैक किया गया. 17.9% मरीजों में हार्ट फेलियर देखा गया. करीब 48% मरीजों में हार्ट की परेशानी के संकेत मिले, जिनका डॉक्टरों ने कभी डायग्नोसिस ही नहीं किया. सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों में पाया गया.

फैटी लिवर और हार्ट फेलियर का छुपा हुआ रिश्ता

फैटी लिवर से इंसुलिन रेसिस्टेंस, सूजन (Inflammation) और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है. ये सब चीजें धमनियों को सख्त कर देती हैं और दिल की मांसपेशियों की कार्यक्षमता घटा देती हैं.

यही वजह है कि फैटी लिवर वाले मरीजों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कार्डियोमायोपैथी और हार्ट फेलियर का खतरा ज्यादा पाया गया है.

क्यों जरूरी है समय रहते पहचानना?

अक्सर फैटी लिवर के कोई लक्षण नहीं होते. यही वजह है कि यह बीमारी चुपचाप बढ़ती रहती है और जब तक पता चलता है, तब तक दिल को भी नुकसान पहुंचा चुकी होती है. अगर किसी को मोटापा, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल है तो लिवर और दिल दोनों की जांच कराना जरूरी है.

बचाव और इलाज कैसे करें?

  • नियमित जांच- फैटी लिवर वाले मरीजों को हार्ट की भी जांच करानी चाहिए.
  • लाइफस्टाइल में बदलाव- हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है.
  • डॉक्टर से परामर्श- हाई रिस्क ग्रुप के लोग (जैसे डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर वाले) डॉक्टर से समय-समय पर सलाह लें.

फैटी लिवर को केवल लिवर की बीमारी समझने की गलती न करें. यह एक दिल का छुपा हुआ दुश्मन भी है. रिसर्च के मुताबिक, इससे हार्ट फेलियर का खतरा 1.5 गुना तक बढ़ सकता है. लेकिन समय पर जांच, सही इलाज और लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके हम इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 28, 2025 10:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).