कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली का पावन पर्व आज, जानें पूजा विधि, विशेष मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक पवित्र त्योहार है जिसे देव दिवाली के रूप में मनाया जाता है. इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है, जिससे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही, सिख धर्म में इस दिन को गुरु नानक देव जी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है.
हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष स्थान है. वर्ष भर में आने वाली 12 पूर्णिमा तिथियों में कार्तिक पूर्णिमा का अत्यधिक महत्व होता है. इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध किया था. इस दिन को देव दीपालवी (देव दिवाली) के रूप में भी मनाया जाता है, जब सभी देवी-देवता स्वर्गलोक से धरती पर आकर पवित्र नदियों के किनारे दीप जलाकर इस पर्व का उत्सव मनाते हैं. इस बार कार्तिक पूर्णिमा तिथि 15 नवंबर 2024 को है, जो सुबह 06:19 बजे से शुरू होकर 16 नवंबर की सुबह 02:58 बजे समाप्त होगी.
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र नदी में स्नान करने और दान करने का विशेष महत्व होता है. ऐसा कहा गया है कि इस दिन स्नान करने से पूरे वर्ष के गंगा स्नान के बराबर फल की प्राप्ति होती है. दीपदान और मां लक्ष्मी की पूजा करने पर विशेष पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है.
कार्तिक पूर्णिमा का सिख धर्म में महत्व
सिख धर्म में भी कार्तिक पूर्णिमा का महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि इसी दिन सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था. इस दिन को सिख धर्म के अनुयायी ‘गुरु पर्व’ के रूप में मनाते हैं. गुरुद्वारों में विशेष पूजा-अर्चना और लंगर का आयोजन किया जाता है.
कार्तिक पूर्णिमा पूजा-विधि
कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रात:काल उठकर स्नान करना और व्रत का संकल्प लेना आवश्यक है. इस दिन पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना शुभ माना गया है. अगर संभव न हो, तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है. इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. विष्णु सहस्रनाम का पाठ और भगवान विष्णु को भोग अर्पण करने से विशेष लाभ होता है. भगवान शिव की पूजा भी इस दिन महत्वपूर्ण मानी जाती है. शिवलिंग पर जल अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है.
विशेष मुहूर्त और समय
स्नान-दान का समय: सुबह 04:58 से 05:51 तक
पूजा का समय: सुबह 06:44 से 10:45 तक
प्रदोष काल में देव दीपावली: शाम 05:10 से रात 07:47 तक
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त: रात 11:39 से 12:33 तक
इस दिन विशेष रूप से दीपदान का महत्व होता है. घर, मंदिर, पीपल के वृक्ष और तुलसी के पास दीप जलाकर देवताओं का स्वागत करना चाहिए. इसी कारण इस दिन को देव दिवाली के नाम से भी जाना जाता है.
कार्तिक पूर्णिमा का पुण्य लाभ
यह दिन केवल पूजा-अर्चना और दीपदान तक ही सीमित नहीं है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर किया गया स्नान-दान और पूजा सभी दोषों से मुक्ति और विशेष पुण्य की प्राप्ति कराता है. इसलिए इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने के लिए लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं. इस प्रकार कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आस्था, विश्वास और पारंपरिक मूल्यों का प्रतीक भी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 15, 2024 07:32 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

