Shani Jayanti 2026 Wishes: कर्मफलदाता शनिदेव की जयंती पर इन हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें अपनों को शुभकामनाएं
साल 2026 में 16 मई को मनाई जाने वाली शनि जयंती के अवसर पर शनिदेव की उपासना और दान-पुण्य का विशेष महत्व है. इस विशेष अवसर पर लोग एक-दूसरे को डिजिटल माध्यमों से बधाई देते हैं. आप भी अपने मित्रों और परिजनों को इन शनिदेव जी की जयंती पर इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए अपनों को शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Shani Jayanti 2026 Wishes In Hindi: हिंदू धर्म में न्याय के देवता और कर्मफलदाता माने जाने वाले शनिदेव (Shani Dev) का जन्मोत्सव इस साल 16 मई 2026, मंगलवार को श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को हुआ था, जिसे हर साल शनि जयंती (Shani Jayanti) के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर कुंडली में मौजूद शनि दोषों का प्रभाव कम होता है और भक्तों को कष्टों से मुक्ति मिलती है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं. कहा जाता है कि जन्म के समय शनिदेव के श्याम वर्ण और रूप को देखकर सूर्यदेव ने माता छाया के चरित्र पर संदेह किया था. अपनी माता के इस अपमान से क्रोधित होकर शनिदेव ने सूर्यदेव पर अपनी वक्र दृष्टि डाली, जिससे सूर्यदेव को दंड भुगतना पड़ा. यही कारण है कि ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में पिता सूर्य और पुत्र शनि के बीच अनबन की चर्चा मिलती है.
ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाने वाली शनि जयंती के अवसर पर शनिदेव की उपासना और दान-पुण्य का विशेष महत्व है. इस विशेष अवसर पर लोग एक-दूसरे को डिजिटल माध्यमों से बधाई देते हैं. आप भी अपने मित्रों और परिजनों को इन शनिदेव जी की जयंती पर इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए अपनों को शुभकामनाएं दे सकते हैं.
शनि जयंती के दिन देश भर के शनि मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त इस दिन शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करते हैं और शनि चालीसा का पाठ करते हैं. कुंडली में शनि दोष को शांत करने के लिए इस दिन विशेष मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
इसके अलावा, शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष दान और कार्यों का विधान है:
- दान कार्य: जरूरतमंदों को काले जूते, काला छाता, तिल, उड़द की दाल, खिचड़ी, काले कपड़े और कंबल का दान करना चाहिए.
- पीपल पूजा: शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना फलदायी माना जाता है.