Ramzan Mubarak 2026 Wishes: माह-ए-रमजान के इन खूबसूरत हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, GIF Greetings के जरिए दें सबको मुबारकबाद
आसमान में रमजान का चांद नजर आते ही लोगों में जोश और उत्साह देखने को मिलता है. माह-ए-रमजान के आगमन पर लोग एक-दूसरे को दिल से मुबारकबाद देते हैं. ऐसे में आप भी इस खास अवसर पर इन खूबसूरत हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए सबको माह-ए-रमजान की मुबारकबाद दे सकते हैं.
Ramzan Mubarak 2026 Wishes in Hindi: इस्लामी कैलेंडर के सबसे पवित्र महीने 'रमजान' (Ramzan 2026) का इंतजार खत्म होने हो रहा है. भारत में आज, बुधवार 18 फरवरी 2026 को चांद रात मनाया जा रहा है और अगले दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अपने रोजे की शुरुआत कर रहे हैं. जी हां, भारत में 19 फरवरी 2026 को पहला रोजा रखा जा रहा है. रमजान (Ramadan) को इस्लाम में रहमतों और बरकतों का महीना माना जाता है, जिसमें दुनिया भर के मुसलमान 29 या 30 दिनों तक उपवास (रोजा) रखकर अल्लाह की विशेष इबादत करते हैं.
रमजान केवल सुबह से शाम तक भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह रूह (आत्मा) को पाक करने और अपने व्यवहार में सुधार लाने का समय है. इस महीने में मुसलमान पांच वक्त की नमाज के साथ 'तरावीह' की विशेष नमाज अदा करते हैं और पवित्र कुरान का पाठ करते हैं. माना जाता है कि इसी महीने में पैगंबर मोहम्मद के सामने इस्लाम की पवित्र पुस्तक 'कुरआन शरीफ' का अनावरण हुआ था, जो इसे बाकी महीनों से श्रेष्ठ बनाता है.
आसमान में रमजान का चांद नजर आते ही लोगों में जोश और उत्साह देखने को मिलता है. माह-ए-रमजान के आगमन पर लोग एक-दूसरे को दिल से मुबारकबाद देते हैं. ऐसे में आप भी इस खास अवसर पर इन खूबसूरत हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए सबको माह-ए-रमजान की मुबारकबाद दे सकते हैं. यह भी पढ़ें: Chand Raat Mubarak 2026 Wishes: माह-ए-रमजान के चांद का दीदार होते ही अपनों को इन हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें चांद रात की मुबारकबाद
रमजान के दौरान रोजे की शुरुआत सूर्योदय से पहले 'सहरी' खाकर की जाती है, जिसके बाद दिन भर बिना कुछ खाए-पिए रहा जाता है. शाम को सूर्यास्त के बाद खजूर या पानी से रोजा खोला जाता है, जिसे 'इफ्तार' कहते हैं. 2026 में फरवरी का महीना होने के कारण भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम सुहावना है, जिससे रोजेदारों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है.
इस्लाम में रोजा रखना हर स्वस्थ वयस्क मुसलमान के लिए अनिवार्य है, लेकिन इसमें कुछ व्यावहारिक छूट भी दी गई हैं. बीमार व्यक्तियों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और यात्रा कर रहे लोगों को रोजा न रखने की अनुमति है. महिलाएं भी मासिक धर्म के दौरान रोजा छोड़ सकती हैं, जिनकी भरपाई वे बाद में कर सकती हैं.