Ramzan Mubarak 2025 Messages: रमजान मुबारक! दोस्तों-रिश्तेदारों संग शेयर करें ये हिंदी Shayaris, WhatsApp Wishes, GIF Greetings और HD Images
रमजान के पवित्र महीने में रोजेदार पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं, इसे खुद को संयमित और अनुशासित बनाए रखने का पाक महीना भी कहा जाता है. रमजान में रोजा रखने को इस्लाम के पांच स्तंभों शाहदा, सलात, जकात, सवाम और हज में से एक माना जाता है. चांद का दीदार होते ही आप इन हिंदी मैसेजेस, शायरी, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स, एचडी इमेजेस को भेजकर दोस्तों-रिश्तेदारों को रमजान मुबारक कह सकते हैं.
Ramzan Mubarak 2025 Messages in Hindi: माह-ए-रमजान (Ramzan) इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना होता है, जिसे इस्लाम धर्म में सबसे पाक महीना माना जाता है. इस साल बरकतों और रहमतों वाले रमजान महीने (Ramzan Month) की शुरुआत 1 मार्च 2025 से हो सकती है, लेकिन यह स्थिति चांद के दीदार पर निर्भर है. अगर भारत में रमजान का चांद 28 फरवरी 2025 को दिखता है तो पहला रोजा 1 मार्च को होगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो रोजे की शुरुआत 2 मार्च से होगी. रमजान महीने में दुनिया भर के मुसलमान 29 से 30 दिनों तक रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं. इस महीने के पहले 10 दिन के रोजा को रहमत, दूसरे 10 दिन के रोजा को बरकत और आखिरी 10 दिन के रोजा को मगफिरत कहा जाता है. इस महीने में अल्लाह की इबादत करना, रोजे रखना, रात में तरावीह की नमाज अदा करना और कुरआन की तिलावत करने का खास महत्व बताया जाता है.
रमजान के पवित्र महीने में रोजेदार पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं, इसे खुद को संयमित और अनुशासित बनाए रखने का पाक महीना भी कहा जाता है. रमजान में रोजा रखने को इस्लाम के पांच स्तंभों शाहदा, सलात, जकात, सवाम और हज में से एक माना जाता है. चांद का दीदार होते ही आप इन हिंदी मैसेजेस, शायरी, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स, एचडी इमेजेस को भेजकर दोस्तों-रिश्तेदारों को रमजान मुबारक कह सकते हैं.





प्रचलित इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान महीने में अल्लाह अपने बंदों के लिए जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं और रोजेदारों की हर दुआ कुबूल होती है. इस पूरे महीने दुनिया भर के मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं. रमजान में रोजेदार सूर्योदय से पहले कुछ खाकर रोजे की शुरुआत करते हैं, जिसे सहरी कहते हैं और सूर्यास्त के बाद इफ्तारी के साथ रोजा खोला जाता है. इस्लाम में खजूर से रोजा खोलने को सुन्नत माना गया है. कहा जाता है कि पैगंबर हजरत मोहम्मद को खजूर पसंद था और वो रोजा खोलने के बाद इसे खाते थे. बाद में यह परंपरा बन गई और आज तक यह सिलसिला बरकरार है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 01, 2025 04:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

