Papankusha Ekadashi 2024 Wishes: पापांकुशा एकादशी की इन हिंदी WhatsApp Messages, Facebook Greetings, Quotes, HD Images के जरिए दें शुभकामनाएं
पापांकुशा एकादशी के व्रत को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है. इस व्रत के पुण्य से पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर श्रीहरि की आराधना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इस अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स, कोट्स, एचडी इमेजेस को भेजकर पापांकुशा एकादशी की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Papankusha Ekadashi 2024 Wishes in Hindi: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया जाता है, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) को अत्यंत प्रिय है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त व्रत रखकर विधि-विधान से श्रीहरि की पूजा-अर्चना करता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं, उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. मां दुर्गा (Maa Durga) की उपासना के नौ दिवसीय पर्व शारदीय नवरात्रि (Sharad Navratri) के बाद आने वाली एकादशी को पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) कहते हैं, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. इस साल 13 अक्टूबर 2024 को पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है, जबकि इस व्रत का पारण 14 अक्टूबर 2024 को किया जाएगा.
पापांकुशा एकादशी के व्रत को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है. इस व्रत के पुण्य से पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर श्रीहरि की आराधना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इस अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स, कोट्स, एचडी इमेजेस को भेजकर पापांकुशा एकादशी की शुभकामनाएं दे सकते हैं.





पापांकुशा एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा स्थल की सफाई करें. एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें, फिर धूप-दीप, फल, फूल, मिठाई, अक्षत, रोली, इत्यादि से पूजन करें. पूजन के दौरान तुलसी दल का उपयोग अवश्य करें. 'ओम् नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप और 'विष्णु सहस्त्रनाम' का पाठ करें. पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें और आखिर में आरती उतारें. अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देने के बाद अपने व्रत का पारण करें.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 13, 2024 06:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

