Pana Sankranti 2025 Messages: पना संक्रांति के इन हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes, Facebook Greetings के जरिए दें उड़िया नववर्ष की शुभकामनाएं
पना संक्रांति यानी उड़िया नववर्ष, ओडिशा की संस्कृति और परंपरा में खासा महत्व रखता है. हिंदू सौर कैलेंडर का यह पहला दिन नए कृषि वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है. इसके साथ ही यह गर्मी के मौसम की शुरुआत का संकेत भी है. इस पर्व की लोग शुभकामना संदेशों के जरिए बधाई भी देते हैं. ऐसे में आप भी इन हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए पना संक्रांति की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Pana Sankranti 2025 Messages in Hindi: चैत्र की तरह बैसाख के महीने को भी बेहद खास माना जाता है, क्योंकि एक तरफ जहां हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष (Hindu New Year) की शुरुआत होती है तो वहीं दूसरी तरफ 13 या 14 अप्रैल से हर साल सौर नववर्ष (Solar New Year) की शुरुआत होती है. सौर नववर्ष की शुरुआत उस दिन होती है, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मेष संक्रांति (Mesh Sankranti) कहते हैं और इस दिन को देश के कई हिस्सों में नए साल के जश्न के तौर पर विभिन्न नामों से मनाया जाता है. भारत के पूर्वी राज्य ओडिशा (Odisha) में नए साल के इस पर्व को पना संक्रांति (Pana Sankranti) के तौर पर मनाया जाता है, जिसे उड़िया नव वर्ष (Odia New Year) या उड़िया न्यू ईयर कहा जाता है. इस साल पना संक्रांति का त्योहार 14 अप्रैल 2025 को मनाया जा रहा है.
पना संक्रांति यानी उड़िया नववर्ष, ओडिशा की संस्कृति और परंपरा में खासा महत्व रखता है. हिंदू सौर कैलेंडर का यह पहला दिन नए कृषि वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है. इसके साथ ही यह गर्मी के मौसम की शुरुआत का संकेत भी है. इस पर्व की लोग शुभकामना संदेशों के जरिए बधाई भी देते हैं. ऐसे में आप भी इन हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए पना संक्रांति की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
पना संक्रांति के पर्व से जुड़ी किंवदंतियों के अनुसार, पुरी में प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के पीठासीन देवता भगवान जगन्नाथ ने चिलचिलाती गर्मी से ठंडक पाने के लिए पना पेय का निर्माण किया था. इस पेय को पानी, गुड़, दही और विभिन्न मसालों से तैयार किया जाता है, जो गर्मी में ठंडक का एहसास दिलाता है. पना पेय को त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, इसलिए इस दिन इसका सेवन सबके साथ मिलकर किया जाता है. इस पर्व के दौरान ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपरा की अनूठी झलक देखने को मिलती है. इस दिन भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.