Lunar New Year, Ramadan-Lent 2026: दुनिया में 163 साल बाद अनोखा संयोग, 24 घंटे के भीतर शुरू हुए रमजान, लेंट और लूनर न्यू ईयर
साल 2026 एक दुर्लभ खगोलीय और सांस्कृतिक संयोग का गवाह बना है. 163 वर्षों में पहली बार, दुनिया के तीन प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव—इस्लामी पवित्र महीना रमजान, ईसाई उपवास काल 'लेंट' (Ash Wednesday) और 'लूनर न्यू ईयर' (चीनी नव वर्ष)—महज 24 घंटे के अंतराल में शुरू हुए हैं.
Lunar New Year, Ramadan-Lent 2026: दुनिया में फरवरी 2026 का यह सप्ताह इतिहास के पन्नों में एक दुर्लभ संयोग के रूप में दर्ज हो गया है. दुनिया भर में अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों को मानने वाले अरबों लोग एक साथ उत्सव और उपवास के रंग में रंगे हैं. 163 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब रमजान, लेंट (Lent) और लूनर न्यू ईयर (Lunar New Year) की शुरुआत एक ही 24 घंटे के चक्र के भीतर हुई है. यह संयोग विभिन्न सौर और चंद्र कैलेंडरों के एक साथ मिलने के कारण संभव हुआ है.
तीन आस्थाओं का एक साथ मिलन
इस ऐतिहासिक संयोग की शुरुआत 17 फरवरी को 'लूनर न्यू ईयर' के साथ हुई, जिसे चीनी नव वर्ष भी कहा जाता है. इसके तुरंत बाद, 18 फरवरी को ईसाई समुदाय के 40 दिवसीय उपवास काल 'लेंट' की शुरुआत 'ऐश वेडनेसडे' (Ash Wednesday) से हुई. इसी बीच, 18 फरवरी की शाम चांद दिखने के साथ ही इस्लाम के सबसे पवित्र महीने रमजान का आगाज हुआ और आज, 19 फरवरी को भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में पहला रोजा रखा जा रहा है. यह भी पढ़े: Lunar Eclipse Today Night: आज रात 8:58 बजे…पूरे भारत में लगेगा दुर्लभ पूर्ण चंद्रग्रहण, जानें लोग खाने में क्यों डालते हैं तुलसी के पत्ते?
क्यों खास है यह संयोग?
आमतौर पर ये तीनों त्योहार अलग-अलग महीनों या हफ्तों में पड़ते हैं क्योंकि ये अलग-अलग कैलेंडर प्रणालियों पर आधारित हैं:
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लूनर न्यू ईयर: यह 'लूनिसोलर' कैलेंडर पर आधारित है.
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रमजान: यह पूरी तरह से 'चांद' (हिजरी कैलेंडर) पर निर्भर है.
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लेंट: यह सौर कैलेंडर के अनुसार ईस्टर से 46 दिन पहले शुरू होता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, इन तीनों का इतने कम अंतराल में एक साथ आना एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, जो पिछली बार 19वीं शताब्दी के मध्य (लगभग 1863 के आसपास) देखी गई थी.
शांति और भाईचारे का संदेश
इस वैश्विक संयोग को दुनिया भर के नेताओं ने मानवता और शांति के संदेश के रूप में सराहा है. भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां रमजान की मुबारकबाद दी, वहीं दुनिया भर के ईसाई धर्मगुरुओं और एशियाई समुदायों ने इस संयोग को 'साझा मानवता' का प्रतीक बताया है. यह समय दुनिया के एक बड़े हिस्से के लिए आत्म-चिंतन, प्रार्थना और परिवार के साथ जुड़ने का है.
वैश्विक स्तर पर उत्सव का माहौल
इस दुर्लभ तालमेल के कारण दुनिया के कई देशों में अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर चीन, वियतनाम और कोरियाई समुदायों में नए साल का जश्न (Year of the Fire Horse) मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चर्चों में प्रार्थनाएं हो रही हैं और मस्जिदों में तरावीह की नमाज गूंज रही है. बाजार भी इस समय उत्सव के सामानों और इफ्तार की तैयारियों से गुलजार हैं.