Lal Bahadur Shastri Jayanti 2019: देश जीता-दिल जीता किंतु जान हार गया! शास्त्री षडयंत्र का शिकार न होते तो पीओके ही नहीं लाहौर भी हमारा होता!
लाल बहादुर शास्त्री (Photo Credits: Getty)

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2019: साल 1962, भारत-चीन युद्ध (India-China War) में भारत को मिली शिकस्त... 1964 में पं. जवाहर लाल नेहरू की अक्समात मृत्यु... उनकी जगह छोटे कद के लालबहादुर शास्त्री का भारत (India) का प्रधानमंत्री बनना... इन तीनों बातों ने सबसे ज्यादा मुगालते में रखा पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) को. उसके तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने समझा कि इतने छोटे कद का इंसान भला सामरिक रूप से कमजोर पड़ चुके भारत की क्या सुरक्षा कर सकेगा. फिर उसे अमेरिका से मिले पैटनटैंक की भी गरमी थी! कुछ देशों के उकसावे और उनसे सैन्य मदद पाकर पाकिस्तान ने भारत पर एक के बाद एक तीन हमले किये. लेकिन उन्हीं छोटे कदवाले लालबहादुर शास्त्री के कुशल नेतृत्व में जब तीनों मोर्चों पर न केवल पाकिस्तान को पटखनी दी, बल्कि भारतीय सेना लाहौर तक पहुंच गयी, तब पाकिस्तान के होश फाख्ता हो गये. भारत यह युद्ध तो जीत गया, लेकिन इसके बाद जिस षडयंत्र का शिकार बनकर शास्त्री जी को अपनी जान गंवानी पड़ी, वह भारत के लिए अपूरणीय क्षति ही थी. आइये जानते हैं शास्त्री जी के पराक्रम की दास्तान...

आज जब जम्मू और कश्मीर में धारा 370 खत्म कर दिया गया है, पाकिस्तान भारत के इस कदम का न केवल पुरजोर विरोध कर रहा है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे ले जाने की असफल कोशिश कर चुका है. दरअसल पाकिस्तान को धारा 370 का उतना भय नहीं है, जितना पीओके के भारत में विलय की सोच का खौफ घर कर चुका है. वास्तव में कश्मीर को लेकर पाकिस्तान हमेशा से लार टपकाता रहा है. इसे हासिल करने के लिए उसने हर संभव कोशिश की, यह अलग बात है कि उसे हर कोशिश का मुंहतोड़ जवाब मिला. कश्मीर को हासिल करने की पाकिस्तान की पहली कोशिश थी ऑपरेशन जिब्राल्टर. इस ऑपरेशन के फ्लाप होने के बाद दोनों देश खुलकर युद्ध के मैदान में आ गये थे.

एक अमेरिकी लेखक स्टैलने वॉलपर्ट ने अपनी पुस्तक इंडिया में लिखा है, -अयूब खान कद्दावर और मजबूत व्यक्ति थे, जबकि शास्त्री छोटे कद के कमजोर व्यक्ति थे. लेकिन भारत की सेना पाकिस्तानी सेना से चार गुना ज्यादा बड़ी थी. जल्दी ही पाकिस्तान की यह सोच कुंद हो गयी कि एक मुस्लिम सैनिक 'दस हिंदू सैनिकों' के बराबर है.' और जब संघर्ष थमा, तब तक भारतीय सेना पाकिस्तान के पंजाब की राजधानी को करीब-करीब कब्जे में ले चुकी थी. यह भी पढ़ें- Lal Bahadur Shastri Jayanti 2019 Inspirational Quotes: लाल बहादुर शास्त्री के इन 10 महान विचारों से लें प्रेरणा और जगाएं अपने दिल में देशभक्ति का जज्बा.

लालबहादुर शास्त्री भले चतुर राजनीतिज्ञ न रहे हों, लेकिन उनके छोटे से दिमाग में देश की सुरक्षा की कूटनीतियों का कोई सानी नहीं हो सकता. उन्होंने बड़े हैरतअंगेज तरीके से भारतीय सेनाओं को सिर्फ जम्मू-कश्मीर तक सीमित न रखकर पाकिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय लाइन ऑफ कंट्रोल के अंदर तक फैल जाने का आदेश दे दिया था. भारतीय सेना लाहौर और सियालकोट पर कब्जे की तैयारी में थी. शास्त्री जी के इस आदेश से पाक सेना हैरान-परेशान थी. उसे विवश होकर छांब-अखूनर सेक्टर से पाक सेना को हटाकर लाहौर और सियालकोट लाना पड़ा. पाकिस्तान के सामने कश्मीर का मोह छोड़ अपनी जमीन बचाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था.

रक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अगर दो घंटे युद्ध और चला होता तो भारतीय सेना लाहौर पर कब्जा कर चुकी होती. जब पाकिस्तान को लगा कि जिस गति से भारतीय सेना आगे बढ़ रही है पाकिस्तान की दुर्गति निश्चित है. माना जाता है कि अंततः पाकिस्तान ने अमेरिका से प्रार्थना की कि वह किसी भी तरह से भारतीय सेना से युद्ध रोकने के लिए कहे. आखिरकार रूस और अमरिका की मिलीभगत से संयुक्त राष्ट्र संघ के संघर्ष विराम के बहाने शास्त्री जी पर प्रेशर बनाते हुए उन्हें एक साजिश के तहत ताशकंद समझौता लिए रूस बुलवाया गया. लेकिन समझौते की रात ही ऊंचे मनोबल वाले प्रधानमंत्री अपने बिस्तर पर मृत पाये गये. वह कैसे मरे, कुछ पता नहीं. क्योंकि उनका न पोस्टमार्टम किया गया था ना ही किसी तरह की आधिकारिक जांच बिठाई गयी. इतिहासकार भी मानते हैं कि अगर शास्त्री जी के साथ षड़यंत्र नहीं किया गया होता तो आज पीओके ही नहीं लाहौर भी हमारा होता.