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Jyotiba Phule Jayanti 2024: अंतिम सांस तक सामाजिक समता एवं स्त्री-शिक्षा के लिए संघर्षरत रहने वाले ज्योतिबा फुले! जानें उनके कुछ प्रेरक कोट्स!

ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 को तात्कालिक ब्रिटिश भारत के पनवाड़ी (पुणे) में हुआ था. माँ का नाम चिमनाबाई और पिता का नाम गोविंदराव था. ज्योतिबा मात्र एक वर्ष के थे, जब माँ चिमनाबाई का निधन हो गया. इनकी परवरिश सुगना बाई दाई के सानिध्य में हुई थी. परिवार के लोग फूलों, गजरा, फूलों की माला आदि का व्यवसाय करते थे, इसलिए उन्हें 'फुले' सरनेम प्राप्त हुआ था.

Jyotiba Phule Jayanti 2024: अंतिम सांस तक सामाजिक समता एवं स्त्री-शिक्षा के लिए संघर्षरत रहने वाले ज्योतिबा फुले! जानें उनके कुछ प्रेरक कोट्स!
महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती (Photo Credits: File Photo)

भारत के अग्रणी और तेज-तर्रार समाज सुधारक, शिक्षक, तथा ओजस्वी विचारकों में एक नाम महात्मा ज्योतिराव फुले का नाम भी शुमार है. ज्योतिबा अंतिम सांस तक अपने भाषणों और लेखों के जरिये समाज में व्याप्त जाति विरोधी भावनाओं के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. वह एक ऐसा दौर था, जब स्त्री-शिक्षा का पुरजोर विरोध होता था, लड़की की जिंदगी घर ड्योढ़ी के भीतर अथवा बच्चा पैदा करने तक सीमित कर दिया गया था. उन्होंने स्त्री-शिक्षा की ही वकालत नहीं की, बल्कि गरीब किसानों एवं मजदूरों के अधिकारों एवं उनकी मूलभूत जरूरतों के लिए भी संघर्षरत रहे. महात्मा ज्योतिबा फुले की 197वीं जयंती (11 अप्रैल) पर आइये जानते हैं ज्योतिबा फुले के अंतरंग जीवन एवं उनके कुछ रोचक कोट्स के बारे में... Navratri 2024 Day-2: आज होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा! जानें इनका महात्म्य, मंत्र, मुहूर्त, पूजा-विधि एवं इनका शुभ रंग!

ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 को तात्कालिक ब्रिटिश भारत के पनवाड़ी (पुणे) में हुआ था. माँ का नाम चिमनाबाई और पिता का नाम गोविंदराव था. ज्योतिबा मात्र एक वर्ष के थे, जब माँ चिमनाबाई का निधन हो गया. इनकी परवरिश सुगना बाई दाई के सानिध्य में हुई थी. परिवार के लोग फूलों, गजरा, फूलों की माला आदि का व्यवसाय करते थे, इसलिए उन्हें 'फुले' सरनेम प्राप्त हुआ था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा मराठी में हुई, मगर बाद में जाति-भेद के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में ही बंद करनी पड़ी. साल 1840 में ज्योतिबा की शादी सावित्रीबाई से हुई. शादी के बाद पत्नी के साथ मिलकर ज्योतिबा फुले ने अपना आंदोलन तेज कर दिया.

ज्योतिबा फुले के प्रेरक कोट्स

पृथ्वी पर मौजूद सभी प्राणियों में मनुष्य श्रेष्ठ है, और सभी मनुष्यों में नारी श्रेष्ठ है. स्त्री और पुरुष जन्म से स्वतंत्र हैं, इसलिए दोनों को सभी अधिकारों का समान रूप से उपभोग करने का अवसर दिया जाना चाहिए.

शिक्षा के बिना, ज्ञान खो गया था; ज्ञान के बिना, नैतिकता खो गई थी; नैतिकता के बिना, विकास खो गया था; विकास के बिना, धन खो गया था; धन के बिना, शूद्र बर्बाद हो गए थे, शिक्षा की कमी के कारण बहुत कुछ हुआ है,

हर गांव में शूद्रों के लिए स्कूल हों, लेकिन सभी ब्राह्मण को स्कूल मास्टरों के रूप में शामिल न किया जाए! शूद्र देश का जीवन और नसें हैं, सरकार को केवल उन्हीं के लिए प्रयास करना चाहिए, न कि ब्राह्मणों के लिए.

यदि कोई किसी भी प्रकार का सहयोग करता है, तो उससे मुंह न मोड़ें.

स्वार्थ भिन्न-भिन्न रूप धारण करता है, कभी जाति का तो कभी धर्म का.

सच्ची शिक्षा दूसरों को सशक्त बनाने और हमें जो दुनिया मिली थी, उससे थोड़ी बेहतर दुनिया बनाने का प्रतीक है.

आर्थिक असमानता के कारण किसानों का जीवन स्तर असंतुलित हो गया है.

बाल काटना नाई का धर्म नहीं, बल्कि व्यवसाय है. चमड़ा सिलना मोची का काम नहीं, धंधा है. उसी प्रकार पूजा करना ब्राह्मण का धर्म नहीं, बल्कि व्यवसाय है.

दुनिया के रचयिता को एक खास पत्थर या एक खास जगह तक कैसे सीमित किया जा सकता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 10, 2024 07:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).